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‘अपराध कभी खत्म नहीं होता’, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच पर केरल के गृह मंत्री

 

तिरुवनंतपुरम, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बुधवार को विधानसभा में बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े करीब दो दशक पुराने आरोपों की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) की जांच आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अपराध कभी खत्म नहीं होता और जांच पूरी होने के बाद इसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे।

चेन्निथला ने कहा, “यह घटना 20 साल पहले हुई थी, लेकिन अपराध कभी खत्म नहीं होता। जांच शुरू हो गई है और इसमें कुछ घटनाएं शामिल हैं, इसलिए इसमें समय लगेगा। जांच आगे बढ़ेगी और सभी पहलुओं को देखा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद निष्कर्षों की घोषणा की जाएगी।”

वह भारतीय संघ मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायक ए.के.एम. अशरफ की ओर से उठाए गए सवाल का जवाब दे रहे थे। यह मामला केरल के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव के रूप में ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल से जुड़े आरोपों की सतर्कता जांच का है।

कांग्रेस नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल की याचिका के बाद 4 अक्टूबर को इस मामले में नई जांच के आदेश दिए गए थे। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या वर्ष 2006 में शुरू की गई प्रारंभिक सतर्कता जांच को बाहरी दबाव के कारण प्रभावित किया गया था।

यह मामला मलेशियाई सिविल इंजीनियर ली सी बीन की मौत से जुड़ा है। ली की नवंबर 2006 में कुआलालंपुर में आत्महत्या से मौत हो गई थी। वह केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (केएसटीपी) के तहत एमसी रोड के उन्नयन का काम करने वाले पीएटीआई-बेल कंसोर्टियम से जुड़े थे।

राज्य के गृह विभाग ने पहले की सतर्कता जांच से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। नई जांच में यह भी देखा जाएगा कि शुरुआती जांच किस तरह की गई थी और क्या किसी बाहरी प्रभाव ने उसकी दिशा को प्रभावित किया था।

चेन्निथला ने पिछले सप्ताह सतर्कता निदेशक को इन आरोपों की विस्तृत जांच करने और निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। मंत्री ने जांच में बाहरी हस्तक्षेप से जुड़े आरोपों को गंभीर बताते हुए उनकी गहन पड़ताल की जरूरत पर जोर दिया है।

यह जांच ऐसे समय में हो रही है, जब कांग्रेस नेतृत्व मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अलग-अलग विवादों के बीच दिल्ली में उनका विरोध कर रहा है। हालांकि, केरल में चल रही जांच का संबंध करीब दो दशक पहले राज्य के एक अधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल से जुड़े आरोपों से है।

उल्लेखनीय है कि कथित सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार के नाम का जिक्र होने या शुरुआती जांच में हस्तक्षेप के आरोपों से अपने आप किसी गलत काम की पुष्टि नहीं होती। नई जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या पहले की जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई थी और क्या आगे कोई कार्रवाई किए जाने की जरूरत है।

राज्य सरकार के मुताबिक, जांच में सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे।

--आईएएनएस

डीएससी