केरल: परीक्षा घोटाले की जांच तेज होने के आसार, पीएससी सदस्यों से पूछताछ का रास्ता साफ
तिरुवनंतपुरम, 18 सितंबर (आईएएनएस)। केरल क्राइम ब्रांच और केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के बीच राज्य योजना बोर्ड परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच को लेकर चल रहा गतिरोध एक बार फिर टकराव की स्थिति की ओर बढ़ता दिख रहा है। जांच एजेंसी को एक कानूनी राय मिली है, जिसमें पीएससी के सदस्यों से पूछताछ करने के उसके अधिकार का समर्थन किया गया है।
इस कानूनी राय के बाद क्राइम ब्रांच को जांच के दायरे में आने वाले पीएससी सदस्यों से पूछताछ करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आधार मिल गया है। माना जा रहा है कि इससे परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच और तेज हो सकती है, जबकि पीएससी और जांच एजेंसी के बीच विवाद भी गहरा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, कानूनी राय में कहा गया है कि पीएससी को मिले संवैधानिक दर्जे का मतलब यह नहीं है कि उसके चेयरमैन या सदस्य जांच एजेंसी द्वारा तय जगह पर जांच अधिकारियों के सामने पेश होने से छूट पा सकते हैं। उम्मीद है कि क्राइम ब्रांच आने वाले दिनों में औपचारिक रूप से यह राय कमीशन को बताएगी।
इस नई घटनाक्रम के बाद पीएससी को अपने पुराने रुख पर फिर से विचार करना पड़ सकता है, जिसमें कहा गया था कि उसके सदस्यों को पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं है। कमीशन ने तर्क दिया था कि उसके सदस्य संवैधानिक पदों पर हैं और इसके बजाय उसने पीएससी ऑफिस में ही उनके बयान दर्ज कराने की पेशकश की थी।
पीएससी ने केरल हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश का भी हवाला दिया था, जिसमें पीएससी अधिकारियों को तब राहत दी गई थी जब उन्हें विधानसभा की एक समिति के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। क्राइम ब्रांच का कहना है कि संवैधानिक दर्जा आपराधिक जांच से छूट नहीं देता है और पीएससी सदस्य जांच में सहयोग करने के लिए बाध्य हैं।
इस नई कानूनी राय को चल रही खींचतान में क्राइम ब्रांच की स्थिति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। अब उम्मीद है कि पीएससी अपने कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा और अगर वह जांच एजेंसी के रुख को चुनौती देने का फैसला करता है तो न्यायिक हस्तक्षेप की मांग भी कर सकता है।
यह विवाद राज्य योजना बोर्ड में वरिष्ठ पदों के लिए पीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच से शुरू हुआ है। खबर है कि क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने परीक्षाओं के आयोजन और मूल्यांकन में गंभीर खामियां पाई हैं और परीक्षा के आधार पर की गई नियुक्तियों की समीक्षा की सिफारिश की है। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या अनियमितताएं प्रक्रिया से जुड़ी थीं या कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने की जानबूझकर की गई कोशिश का हिस्सा थीं।
एसआईटी ने पूछताछ के लिए पीएससी चेयरमैन और उसके सदस्यों को पहले ही नोटिस जारी कर दिए हैं। एक सदस्य, एस.ए. सैफ, निर्देश मिलने के बावजूद 15 सितंबर को क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए।
परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के तौर पर शुरू हुआ यह मामला अब पीएससी के संवैधानिक संरक्षण के दायरे और आपराधिक जांचकर्ताओं की शक्तियों को लेकर एक बड़े विवाद में बदल गया है। क्राइम ब्रांच के पास अब अपने पक्ष में कानूनी राय है, इसलिए अब सबकी नजर इस बात पर है कि पीएससी क्या प्रतिक्रिया देता है।
--आईएएनएस
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