असम में हाथियों की सुरक्षा के लिए एनएफआर और वन विभाग ने बढ़ाया समन्वय
गुवाहाटी, 19 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) असम वन विभाग के साथ करीबी समन्वय और अपने अग्रिम पंक्ति के रेल कर्मचारियों की सतर्कता के जरिए रेलवे पटरियों को पार करने वाले हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय कदम उठा रहा है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि बुधवार तड़के असम वन विभाग के अधिकारियों ने रेलवे अधिकारियों के साथ समन्वय कर डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को लुमडिंग-हाबाईपुर सेक्शन में समय पर रुकवाया। इससे हाथियों के एक झुंड को सुरक्षित तरीके से रेलवे ट्रैक पार करने में मदद मिली।
पिछले कुछ दिनों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जो एनएफआर के लोको पायलटों की सतर्कता को दर्शाते हैं। 15 अगस्त को गुवाहाटी-मरियानी एक्सप्रेस के लोको पायलट की सतर्कता से लामसाखांग-पाथरखोला सेक्शन में हाथियों का एक झुंड सुरक्षित रूप से रेलवे ट्रैक पार कर सका।
इसी तरह 16 अगस्त को नरंगी-अगरतला एक्सप्रेस के लोको पायलट ने समय रहते कार्रवाई करते हुए हाबाईपुर-लामसाखांग सेक्शन में हाथियों को सुरक्षित तरीके से ट्रैक पार करने का अवसर दिया।
शर्मा ने कहा कि ये घटनाएं एनएफआर और वन विभाग के बीच प्रभावी समन्वय के साथ-साथ रेलवे के परिचालन कर्मचारियों की सतर्कता और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास हाथियों और ट्रेनों के बीच टकराव रोकने तथा हाथी गलियारों में वन्यजीवों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एनएफआर ने संवेदनशील क्षेत्रों में हाथी-ट्रेन टक्कर की घटनाओं को रोकने के लिए कई सक्रिय और तकनीक आधारित उपाय किए हैं। इनमें डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम (डीएएस) तकनीक पर आधारित एआई-सक्षम इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (आईडीएस) की तैनाती शामिल है। यह प्रणाली रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की गतिविधि का वास्तविक समय में पता लगाकर अलर्ट जारी करती है।
इसके अलावा हाथियों की मौजूदगी के आधार पर रात के समय और अस्थायी गति प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। रेलवे ने गश्त बढ़ाने, ट्रेन क्रू को संवेदनशील बनाने, चेतावनी संकेत लगाने, वनस्पतियों की सफाई और वन विभाग के साथ रियल-टाइम समन्वय जैसे कदम भी उठाए हैं।
संवेदनशील स्थानों पर ‘प्लान बी’ प्रणाली भी लगाई गई है, जिसमें हाथियों को रेलवे ट्रैक से दूर रखने के लिए तेज आवाज में मधुमक्खियों की भनभनाहट का इस्तेमाल किया जाता है।
एनएफआर ने चिन्हित स्थानों पर अंडरपास का निर्माण भी शुरू किया है, ताकि वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से हो सके और हाथियों को रेलवे ट्रैक पर आने से रोका जा सके।
शर्मा ने कहा कि एनएफआर सुरक्षित रेल परिचालन के साथ-साथ क्षेत्र के समृद्ध वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई तकनीकों को अपनाने, वन्यजीव अधिकारियों के साथ समन्वय मजबूत करने और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की सतर्कता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि एनएफआर के हाथी गलियारों में समय पर हस्तक्षेप बेहद महत्वपूर्ण है, जहां रेलवे कर्मचारियों और वन विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वित प्रयास हाथी-ट्रेन टक्कर रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) का मुख्यालय गुवाहाटी के पास मालीगांव में है। यह पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल के सात जिलों और उत्तर बिहार के पांच जिलों में रेल परिचालन करता है।
--आईएएनएस
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