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ईडी द्वारा दर्ज 59 पीएमएलए मामलों में से 56 में दोषसिद्धि के आदेश पारित: मंत्री पंकज चौधरी

 

नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के मामलों के लिए बनी विशेष अदालतों ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े 59 मामलों में फैसले सुनाए हैं। इनमें से 56 मामलों में दोषसिद्धि के आदेश पारित किए गए हैं, जिनमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 1 अप्रैल, 2021 से 28 फरवरी, 2026 तक की पांच साल की अवधि के दौरान दायर किए गए मामलों में 124 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है।

मंगलवार को संसद में पेश की गई जानकारी के अनुसार, कुछ ऐसे मामले हैं जिनमें आरोपी को मुख्य अपराध के मामले में बरी होने या आरोपमुक्त होने, या अन्य कारणों से, ईडी के मामले पर विचार किए बिना ही, बरी या आरोपमुक्त कर दिया गया है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि इस दौरान, ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 903 लोगों को गिरफ्तार किया है। ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 4,377 एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) भी दर्ज की हैं।

इसी अवधि के दौरान, 1,245 मामलों में विशेष पीएमएलए अदालतों के समक्ष आरोप-पत्र दाखिल किए गए हैं, जिनमें आरोपियों को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराधों के लिए दोषी ठहराने और अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की मांग की गई है। मंत्री पंकज चौधरी ने आगे बताया कि इन मामलों में पीएमएलए मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों के सामने 447 सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दायर की गई हैं।

1 अगस्त, 2019 से लागू पीएमएलए में संशोधन के बाद, जिन मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं बनता, उनमें ईडी को विशेष पीएमएलए अदालत के सामने क्लोजर रिपोर्ट दायर करना जरूरी है।

मंत्री ने आगे कहा, "तब से ईडी ने संबंधित विशेष अदालत के सामने 93 ऐसे मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दायर की है, जिनमें अलग-अलग कारणों से मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं बनता, जैसे कि शेड्यूल अपराध का मामला बंद होना, ऐसे मामले जिनमें प्रेडिकेट अपराध की अदालत को पीएमएलए के तहत परिभाषित शेड्यूल अपराध से जुड़ा कोई अपराध नहीं मिलता, प्रेडिकेट अपराध का मामला रद्द होना, वगैरह।"

--आईएएनएस

पीएसके