क्विक कॉमर्स का बढ़ता असर: अब कीमत नहीं, सुविधा बन रही खरीदारी की पहली पसंद
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 70 प्रतिशत से ज्यादा उपभोक्ताओं ने कहा कि अगर छूट कम भी हो जाए, तब भी वे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जारी रखेंगे। इससे साफ है कि अब लोग कीमत से ज्यादा तेजी और सुविधा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रोजमर्रा की किराना खरीदारी के लिए मोहल्ले की दुकानें (किराना स्टोर) अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और भरोसे पर आधारित लेन-देन के लिए लोगों की पहली पसंद बनी हुई हैं। हालांकि, पिछले एक साल में 51 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि उनका किराना दुकानों पर निर्भरता कम हुई है।
करीब 45 प्रतिशत लोग क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल आखिरी समय या जरूरी सामान खरीदने के लिए करते हैं, जबकि 24 प्रतिशत लोग दूध और ब्रेड जैसे रोजमर्रा के सामान के लिए इसका उपयोग करते हैं। वहीं, 19 प्रतिशत लोग स्नैक्स और पेय पदार्थ जैसी अचानक खरीदारी (इम्पल्स बाइंग) के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेते हैं।
दूसरी ओर, 13 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अब पहले से ज्यादा किराना दुकानों पर निर्भर हैं, जबकि 27 प्रतिशत लोगों की खरीदारी की आदतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, किराना दुकानदारों को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कम मुनाफा (मार्जिन), कम समय का उधार (क्रेडिट साइकिल) और ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाएं, खासकर प्रोडक्ट की उपलब्धता और विविधता को लेकर।
हालांकि, कई किराना दुकानदार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं।
यह रिपोर्ट देश भर में 1,600 से ज्यादा उपभोक्ताओं और 1,000 से अधिक किराना दुकानदारों के सर्वे पर आधारित है।
करीब 40 प्रतिशत किराना दुकानदारों ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी में रुचि दिखाई, जबकि 32 प्रतिशत ने कहा कि वे रुचि तो रखते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं है कि यह साझेदारी कैसे काम करेगी।
इसके अलावा, 20 प्रतिशत दुकानदारों ने कहा कि अगर उन्हें तकनीकी और संचालन से जुड़ी मदद मिले, तो वे इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं। इससे साफ है कि भविष्य में किराना दुकानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की बड़ी संभावनाएं हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अब ज्यादातर किराना दुकानों पर डिजिटल पेमेंट आम हो चुका है और यूपीआई व क्यूआर कोड के जरिए भुगतान व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है।
हालांकि, पीओएस सिस्टम, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और डिजिटल ऑर्डरिंग जैसे एडवांस टूल्स का इस्तेमाल अभी सीमित है, जिसका कारण उनकी लागत, ट्रेनिंग की जरूरत और संचालन की जटिलता है।
--आईएएनएस
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