संघर्ष के बीच आकार ले रही है दुनिया की नई व्यवस्था : रूस के राष्ट्रपति पुतिन
मॉस्को, 27 जुलाई (आईएएनएस)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को कहा कि दुनिया में नए वर्ल्ड ऑर्डर की रूपरेखा संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच तैयार हो रही है।
मॉस्को के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस के सेंट जॉर्ज हॉल में रूसी संसद (स्टेट ड्यूमा) के आठवें कार्यकाल के सांसदों को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि पिछले पांच साल देश के लिए मुश्किल और बेहद चुनौतीपूर्ण रहे हैं।
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, पुतिन ने कहा, "पिछले पांच साल, जो आपके कार्यकाल का भी समय था, हमारे देश के लिए कठिन और बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। यह हमारे देश के इतिहास के सबसे अहम दौर में से एक है। आज हमारे लोगों की किस्मत और देश का भविष्य दांव पर लगा है। यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है। इसी दौरान संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच दुनिया की नई व्यवस्था की रूपरेखा तैयार हो रही है।"
उन्होंने कहा, "आज भी हम अपने देश की सुरक्षा, आजादी, सच्चाई और न्याय की रक्षा कर रहे हैं। विशेष सैन्य अभियान (स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन) में शामिल हमारे सैनिक रूस और अपनी मातृभूमि के लिए बहादुरी से लड़ रहे हैं। पूरा देश और समाज उनके साथ खड़ा है। हम अपने लक्ष्य जरूर हासिल करेंगे और जीत तथा रूस के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।"
पिछले हफ्ते, सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों से संबंधों के विशेष राष्ट्रपति प्रतिनिधि बोरिस तितोव ने कहा कि 2030 के बाद की दुनिया की व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर होने वाली चर्चा में रूस अहम भूमिका निभा रहा है।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के हाई-लेवल पॉलिटिकल फोरम ऑन सस्टेनेबल डेवलपमेंट (एचएलपीएफ) में रूसी प्रतिनिधिमंडल की अगुआई करने के बाद तितोव ने पत्रकारों से कहा, "आज की हमारी यह यात्रा सिर्फ शुरुआत है। रूस इस बात पर चर्चा शुरू कर रहा है कि 2030 के बाद दुनिया की व्यवस्था और देशों के बीच रिश्तों की नई रूपरेखा कैसी होनी चाहिए। यह वैश्विक संबंधों की एक नई संरचना होगी।"
उन्होंने कहा, "अगर हमारी ताकत की बात करें तो डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भी रूस मजबूत है। असली दुनिया यानी जमीन पर होने वाले कामों में हमारी ताकत सबसे ज्यादा है। अनाज ऑनलाइन नहीं उगाया जा सकता, हर घर तक पानी इंटरनेट के जरिए नहीं पहुंचाया जा सकता और आर्कटिक को क्लाउड पर नहीं ले जाया जा सकता। इसलिए हम उन जरूरी कामों में सबसे मजबूत हैं, जो लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े हैं।"
पिछले महीने फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष कॉन्स्टेंटिन कोसाचेव ने कहा था कि दुनिया की व्यवस्था में बदलाव सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह वास्तव में दिखाई भी देना चाहिए।
--आईएएनएस
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