कांग्रेस ने चीनी राष्ट्रपति के साथ बैठक को लेकर प्रधानमंत्री से पूछे सवाल
नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक को लेकर रविवार को सवाल किए। पार्टी ने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर सरकार के नजरिए और पड़ोसी एशियाई देश के मामलों में कथनी और करनी के बीच 'मेल न होने' पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक प्रेस नोट में भारत-चीन सीमा पर हुई झड़पों पर पीएम मोदी के 2020 के बयानों पर सवाल उठाए और दावा किया कि भारत ने पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार चीन को सौंप दिए हैं।
उन्होंने पूछा कि क्या 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री के इस बयान से कि भारतीय क्षेत्र में कोई नहीं घुसा है, गलवान घाटी की झड़पों के बाद भारत की बातचीत की स्थिति कमजोर हुई है।
उन्होंने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन के कथित क्षेत्रीय विस्तार पर भी चिंता जताई।
कांग्रेस नेता ने दावा किया, "अरुणाचल प्रदेश में चीन के अतिक्रमण की खबरें आई हैं, जिसमें भारत की गश्त बिंदुओं तक पहुंच का नुकसान और नए गतिरोध शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश पर चीन का रुख और सख्त हो गया है, जिसमें कस्बों के नाम बदलना, जिसे वह 'दक्षिण तिब्बत' कहता है, उस पर अपना दावा फिर से जताना, और ब्रह्मपुत्र के 'ग्रेट बेंड' पर अपने 60,000-मेगावाट के मेडोग मेगा-डैम प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना शामिल है। यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जो उसे हमारे पूरे पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा पर मजबूत पकड़ देता है।"
जयरान रमेश के ये बयान पीएम मोदी द्वारा चीनी राष्ट्रपति को यह बताने के एक दिन बाद आए हैं कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध बनाने का एक 'महत्वपूर्ण हिस्सा' है।
कांग्रेस नेता ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को चीन के कथित समर्थन पर मोदी सरकार के 'रुख में नरमी' पर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या यह चीनी राष्ट्रपति की मेजबानी से पहले माहौल बदलने की रणनीति का हिस्सा था।
कांग्रेस नेता ने कहा, "4 जुलाई 2025 को, सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान की मदद करने में चीन की गहरी और अहम भूमिका के बारे में सेना के आकलन के बारे में बात की थी, लेकिन अचानक 25 अगस्त 2026 को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने वीआईएफ में एक लेक्चर में बिल्कुल अलग रुख अपनाया, वीआईएफ जिसके साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खुद भी निकटता से जुड़े रहे हैं।"
उन्होंने चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, "आपने चीन के साथ व्यापार घाटे को रिकॉर्ड स्तर तक क्यों पहुंचने दिया? 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे हमारे उद्योग का एक बड़ा हिस्सा, खासकर एमएसएमई, बर्बाद हो गया। जरूरी कच्चे माल, मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स और इंटरमीडिएट्स के लिए चीन पर निर्भरता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है।" साथ ही, उन्होंने सरकार से इस अस्वीकार्य स्थिति को बदलने के लिए उसके रोडमैप के बारे में भी पूछा।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी