असम में कुछ इलाकों तक सिमट गई है कांग्रेस: दिप्लु रंजन सरमा
गुवाहाटी, 21 मार्च (आईएएनएस)। असम के न्यू गुवाहाटी विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार दिप्लु रंजन सरमा ने शनिवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य में पार्टी का संगठनात्मक आधार काफी सिमट गया है और अब वह केवल कुछ सीमित इलाकों तक ही रह गई है।
चुनावी प्रचार के दौरान पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने कहा, “कुछ क्षेत्रों को छोड़ दें तो पूरे राज्य में कांग्रेस का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं बचा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावी शासन मॉडल पेश करने में विफल रहने के कारण कांग्रेस ने जनता का भरोसा खो दिया है।
उन्होंने कहा कि अब मतदाता केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि काम और प्रदर्शन के आधार पर वोट दे रहे हैं। सरमा ने भाजपा के विकास एजेंडे पर भरोसा जताते हुए कहा कि जनता यह देख रही है कि कौन-सी पार्टी नतीजे देने में सक्षम है।
अपनी उम्मीदवारी को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए ‘बाहरी’ होने के आरोपों को खारिज करते हुए, उन्होंने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से गुवाहाटी में रह रहे हैं। उन्होंने सवाल किया, “इतने लंबे समय तक यहां रहने के बाद मुझे बाहरी कैसे कहा जा सकता है?”
तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने वायनाड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने मार्गेरीटा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, तो क्या उन्हें बाहरी कहा गया था?
विकास के मुद्दों पर जोर देते हुए सरमा ने कहा कि गुवाहाटी को योजनाबद्ध शहरी विस्तार, बेहतर बुनियादी ढांचे और ट्रैफिक जाम व जलभराव जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार इन क्षेत्रों में काम करने की क्षमता पहले ही दिखा चुकी है।
उन्होंने रोजगार सृजन, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा सुविधाओं को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
सरमा ने यह भी कहा कि गुवाहाटी के लोग स्थिरता और विकास चाहते हैं, जिसे भाजपा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि शर्मा ने 2024 में समागुड़ी विधानसभा उपचुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया था। यह सीट लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रही थी और यहां से रकीबुल हुसैन प्रतिनिधित्व करते थे, जो 2024 के आम चुनाव में धुबरी से लोकसभा सांसद चुने गए थे। इस चुनाव में उन्होंने बदरुद्दीन अजमल को हराया था।
उपचुनाव में कांग्रेस ने रकीबुल हुसैन के बेटे तंजील हुसैन को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें दिप्लु रंजन सरमा के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
सरमा की इस जीत को उनकी मजबूत जमीनी पकड़ और प्रभावी चुनावी रणनीति का परिणाम माना गया, जिसमें उन्होंने विभिन्न वर्गों के मतदाताओं का समर्थन हासिल किया।
--आईएएनएस
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