कर्नाटक: भाजपा नेता की हत्या के मामले में पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी पाए गए दोषी
बेंगलुरु, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। बेंगलुरु की एमपी/एमएलए कोर्ट ने बुधवार को वरिष्ठ कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी को भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में दोषी करार दिया।
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अंतिम फैसला सुनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वह विनय कुलकर्णी और अन्य आरोपियों को हिरासत में ले।
विनय कुलकर्णी इस मामले में आरोपी नंबर 15 हैं। वह वर्तमान में कर्नाटक अर्बन वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश का दोषी पाया है। सजा का ऐलान गुरुवार, 16 अप्रैल को किया जाएगा।
इस बीच, अदालत ने आरोपी नंबर 20 और 21 वासुदेव निलेकणी और सोमशेखर को रिहा करने का आदेश दिया। सीबीआई ने इस मामले में कुल 21 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से 17 आरोपियों को दोषी पाया गया है। 21 में से दो आरोपियों ने सरकारी गवाह (अपप्रूवर) बनकर बयान दिया था। इस तरह अदालत ने कुल 19 आरोपियों को दोषी ठहराया है।
आरोपी नंबर 1 बसवराज मुत्तगी ने सरकारी गवाह बनकर बयान दिया था, जबकि आरोपी नंबर 17 शिवानंद ने अपप्रूवर बनने के बावजूद विरोधाभासी बयान दिया, इसलिए सीबीआई ने उसे फिर से आरोपी बनाने के लिए आवेदन दिया है।
इस मामले में आरोपी नंबर 2 विक्रम, 3 कीर्ति कुमार, 4 संदीप, 5 विनायक, 6 महाबलेश्वर उर्फ मुदाका, 7 संतोष, 8 दिनेश, 9 अश्वथ, 10 सुनील, 11 नजीर अहमद, 12 शनवाज, 13 नूतन, 14 हर्षित, 15 विनय कुलकर्णी, 16 चंद्रु मामा, 18 विकास कलबुर्गी और 19 चन्नकेशव तिंगारिकर को दोषी करार दिया गया है।
गौरतलब है कि बेंगलुरु की विधायकों/सांसदों की विशेष अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाने की तारीख 15 अप्रैल तय की थी। यह मामला 2016 का है और अदालत इस घटना से जुड़े 21 अन्य आरोपियों के भाग्य पर भी फैसला सुना रही है।
इस केस की जांच राज्य सरकार ने सीबीआई को सौंपी थी। आरोप लगने के समय विनय कुलकर्णी सिद्धारमैया सरकार में मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री थे।
15 जून 2016 को धारवाड़ शहर के एक जिम में भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हथियारबंद हमलावरों ने हत्या कर दी थी। वह राजनीतिक रूप से विनय कुलकर्णी को चुनौती दे रहे थे और इसके बाद यह मामला गंभीर हो गया था।
कुलकर्णी को 2020 में गिरफ्तार किया गया था और 2021 में जमानत मिली थी। उन पर गवाहों को प्रभावित करने के आरोप भी लगे, जिसके बाद सीबीआई ने जमानत रद्द करने की मांग की और अदालत ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी।
इसके बाद कुलकर्णी ने आत्मसमर्पण किया और बाद में उन्हें फिर से जमानत मिली।
उन्हें योगेश गौड़ा की हत्या की साजिश में आरोपी बनाया गया था। उस समय वे सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री थे।
बाद में भाजपा ने इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया और तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो कुलकर्णी को जेल भेजा जाएगा।
इसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया और कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया। वह नौ महीने से अधिक समय तक जेल में रहा और बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत प्राप्त की।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी