महाराष्ट्र : कांग्रेस विधायक ने सीईओ को लिखा पत्र, एसआईआर प्रक्रिया में नाम हटाए जाने पर जताई चिंता
मुंबई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) एस चोकलिंगम को पत्र लिखकर मुंबई की मुंबादेवी विधानसभा सीट में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर गंभीर चिंता जताई है।
अपने पत्र में अमीन पटेल ने कहा कि 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में करीब 95,732 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इनके हटाए जाने के कारण अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या मृत (एएसडीडी) मतदाता बताए गए हैं, लेकिन उनका आरोप है कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की खराब पहुंच और उचित संवाद की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार है।
अमीन पटेल ने कहा कि 8 सितंबर तक क्षेत्र में एक भी फॉर्म-6 (दोबारा नाम जुड़वाने और नए पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म) स्वीकार नहीं किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं के नाम में गड़बड़ी थी या जिनकी स्थिति अस्पष्ट थी, उन्हें सुनवाई के लिए कोई आधिकारिक नोटिस भी नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि कई नागरिकों ने जब अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क करने की कोशिश की तो उनके फोन या तो बंद मिले या कॉल का जवाब नहीं मिला। इससे अपने मतदाता दर्जे को सही कराने की कोशिश कर रहे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पटेल ने यह भी कहा कि आने वाले गणेशोत्सव के दौरान बीएलओ त्योहार संबंधी जिम्मेदारियों में व्यस्त रहेंगे, जिससे बड़ी संख्या में लोग वर्तमान समयसीमा के भीतर आवेदन जमा नहीं कर पाएंगे।
इसी वजह से उन्होंने किसी भी पात्र मतदाता को मतदान अधिकार से वंचित होने से बचाने के लिए समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि फॉर्म-6 जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 अक्टूबर की जाए। गड़बड़ी और अनमैप्ड मतदाताओं की सुनवाई की अवधि 29 अक्टूबर से बढ़ाकर 30 नवंबर की जाए।
पटेल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मामले की गंभीरता को देखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की अपील की है।
पटेल की यह मांग ऐसे समय आई है, जब 31 अगस्त को जारी प्रारूप मतदाता सूची में 2.07 करोड़ मतदाता बाहर पाए गए थे। इनमें 75.52 लाख मतदाता अनुपस्थित या खोजे नहीं जा सके, 76.80 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके थे, 34.81 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी, 17.63 लाख नाम डुप्लीकेट थे या वे कहीं और पहले से पंजीकृत थे, जबकि 2.23 लाख मामलों में अन्य कारण बताए गए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने स्पष्ट किया कि 2.07 करोड़ मतदाताओं का 'अनकलेक्टेबल एन्यूमरेशन फॉर्म' श्रेणी में आना तुरंत और स्थायी रूप से नाम हटाए जाने का मतलब नहीं है। इसका अर्थ केवल इतना है कि एसआईआर-2026 अभियान के तहत उन्हें प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने सभी मतदाताओं से अपील की कि वे केवल राज्य स्तरीय आंकड़ों पर ध्यान न दें, बल्कि यह जांच करें कि उनका नाम सूची में है या नहीं और उनकी जानकारी सही दर्ज है या नहीं।
चोकलिंगम ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है तो वह उसे जोड़ने के लिए आवेदन कर सकता है। यदि जानकारी में कोई गलती है, तो उसमें सुधार कराया जा सकता है। वहीं यदि किसी नाम को हटाया गया है, तो संबंधित व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर दोबारा शामिल होने के लिए आवेदन कर सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रारूप मतदाता सूची अंतिम सूची नहीं है और अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले दावे और आपत्तियों की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
--आईएएनएस
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