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यूसीसी पर कांग्रेस ने सांप्रदायिक ताकतों के आगे घुटने टेक दिए: सीएम हिमंत सरमा

 

गुवाहाटी, 27 मई (आईएएनएस)। असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपनी संवैधानिक विरासत को छोड़कर “सांप्रदायिक ताकतों” के सामने समर्पण कर दिया है।

यूसीसी विधेयक पारित होने से पहले चर्चा में भाग लेते हुए सरमा ने कहा कि समान नागरिक संहिता का विचार न तो भाजपा और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की देन है, बल्कि यह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस नेताओं की सोच का भी हिस्सा था।

उन्होंने कहा, “यूसीसी की दिशा में प्रयास भाजपा या आरएसएस से शुरू नहीं हुए थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस के नेताओं ने भी देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का सपना देखा था।”

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आज की कांग्रेस राजेंद्र प्रसाद और सरदार वल्लभभाई पटेल की कांग्रेस नहीं रही।

उन्होंने कहा, “आज की कांग्रेस में धर्मनिरपेक्षता पर बोलने का साहस नहीं बचा है।”

सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि यूसीसी विधेयक का विरोध करते समय कांग्रेस संवैधानिक सिद्धांतों की बजाय धार्मिक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस की जिम्मेदारी संविधान का प्रतिनिधित्व करने की थी, लेकिन आज पार्टी सिर्फ शरीयत और कुरान की बात कर रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की स्पष्ट परिकल्पना की गई है और संविधान निर्माताओं ने उम्मीद की थी कि देश धीरे-धीरे समान नागरिक ढांचे की ओर बढ़ेगा।

उन्होंने कहा, “संविधान ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जैसे-जैसे देश आगे बढ़ेगा, भारत को समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ना चाहिए।”

सरमा ने कांग्रेस पर असम और केरल जैसे राज्यों में राजनीतिक कारणों से “सांप्रदायिक ताकतों” के साथ खड़े होने का आरोप भी लगाया।

उनके मुताबिक, कांग्रेस अब सभी धर्मों के बारे में समान रूप से बोलने का आत्मविश्वास खो चुकी है और उसकी राजनीति चुनिंदा धार्मिक मुद्दों तक सीमित हो गई है।

भाजपा नीत असम सरकार का कहना है कि प्रस्तावित यूसीसी समानता और सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में कदम है, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने विधेयक के कई प्रावधानों का विरोध किया है।

--आईएएनएस

डीएससी