छात्रों के भविष्य की रक्षा करने में सरकार विफल: मणिकम टैगोर
नई दिल्ली, 12 मई (आईएए)। पेपर लीक के आरोपों के बाद नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने को लेकर कांग्रेस नेताओं ने मंगलवार को केंद्र सरकार का घेराव किया। उन्होंने पेपर लीक की घटना को 'भ्रष्ट व्यवस्था' का प्रतिबिंब बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही और इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि एनडीए सरकार में बार-बार पेपर लीक होना आम बात हो गई है। केंद्र सरकार पर छात्रों के भविष्य की रक्षा करने में विफल रहने का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसद ने कहा, "नीट पेपर लीक होना अब आम बात हो गई है। लाखों छात्र परीक्षा की तैयारी में घंटों-दिन बिताते हैं। उनके माता-पिता पैसे उधार लेकर उन्हें कोचिंग सेंटर भेजते हैं। इन सबके बाद पेपर लीक हो जाते हैं।"
उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने एग्जाम सिस्टम का मजाक उड़ाया है और समझौतावादी शिक्षा ढांचे का समर्थन किया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं तो जांच समितियां गठित की जाती हैं, लेकिन कोई दीर्घकालिक समाधान लागू नहीं किया जाता है।
टैगोर ने कहा, "जब भी नीट के प्रश्नपत्र लीक होते हैं, जांच के लिए समिति गठित की की जाती है। इस बार इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया है। यह पूरी तरह से समय की बर्बादी है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को इस्तीफा देना चाहिए। विशेष रूप से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि सरकार जवाबदेही से भाग नहीं सकती।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने भी परीक्षा रद्द होने के छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने पूछा, "नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है और लगभग 25 लाख छात्रों को अब परीक्षा में दोबारा बैठना होगा। जब भी प्रश्नपत्र लीक होता है, जांच की जाती है और कुछ दोषियों को सजा दी जाती है, लेकिन जिम्मेदार नेताओं का क्या?"
उन्होंने आगे कहा, "क्या राजस्थान के मुख्यमंत्री इस घटना की जिम्मेदारी लेंगे? क्या प्रधानमंत्री मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के सदस्य नैतिकता के आधार पर जिम्मेदारी लेंगे?"
तिवारी ने कहा कि इस मुद्दे ने देश भर में लाखों परिवारों को प्रभावित किया है और पेपर लीक को 'संगठित अपराध' करार दिया।
उन्होंने कहा, "अगर हम प्रत्येक परिवार में औसतन पांच सदस्यों को मानें तो 25 लाख छात्रों का मतलब है कि एक करोड़ से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। यह एक संगठित अपराध बन गया है।"
कांग्रेस नेताओं ने देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक को रद्द किए जाने के बाद सत्ता में बैठे लोगों से राजनीतिक जवाबदेही पर सवाल उठाए और नैतिक जिम्मेदारी की मांग की।
तृणमूल कांग्रेस से सांसद सौगत रॉय ने कहा, "यह बहुत बुरा है। नीट परीक्षा पूरे देश में चिकित्सा परीक्षाओं के लिए आयोजित की जाती है। लोगों को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी या राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग पर भरोसा है। इन सब घटनाओं से यह भरोसा टूट जाएगा।”
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "उन छात्रों का क्या होगा, जिन्होंने परीक्षा की तैयारी में कड़ी मेहनत की है और जिनके माता-पिता ने कोचिंग फीस पर लाखों रुपए खर्च किए हैं? भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को उन छात्रों और अभिभावकों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।"
--आईएएनएस
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