कांगो में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, इबोला के मामले बढ़कर 896 हुए
किंशासा, 19 जून (आईएएनएस)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 896 हो गई है, जिनमें 232 लोगों की मौत हो चुकी है। डीआरसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
बुधवार को पूर्वी प्रांतों इटुरी और नार्थ किवू में इबोला के 21 नए पुष्ट मामले सामने आए, जिनमें छह मौतें शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी दैनिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, बंडिबुग्यो इबोला वायरस से फैले इस प्रकोप ने पूर्वी डीआरसी के तीन प्रांतों इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु के 33 स्वास्थ्य क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि 383 मरीज या तो आइसोलेशन में हैं या अस्पतालों में भर्ती हैं जबकि 78 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें 11 ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिन्हें नियंत्रण जांच (कंट्रोल टेस्ट) में नकारात्मक परिणाम आने के बाद स्वस्थ घोषित किया गया।
बुधवार को 151 संदिग्ध मामले भी दर्ज किए गए, जिनमें 35 मौतें शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, तीनों प्रांतों में कुल 6,367 संपर्कों (कॉन्टैक्ट्स) की निगरानी की जा रही है। इनमें से 4,525 लोगों तक रिपोर्टिंग अवधि के दौरान पहुंच बनाई गई, जो 71.1 प्रतिशत की फॉलो-अप दर को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पुष्ट मामलों की संख्या सप्ताह-दर-सप्ताह लगातार बढ़ रही है, जो समुदाय स्तर पर संक्रमण के जारी रहने का संकेत देती है। रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को शीघ्रता से लागू नहीं किया गया, तो संक्रमण का भौगोलिक विस्तार तेजी से हो सकता है।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, डीआरसी में यह मौजूदा प्रकोप इबोला का 17वां प्रकोप है, जिसे आधिकारिक रूप से 15 मई को घोषित किया गया था।
इबोला रोग पहली बार वर्ष 1976 में दो समानांतर प्रकोपों के दौरान सामने आया था। पहला प्रकोप सूडान वायरस रोग का था, जो नजारा (वर्तमान साउथ सूडान) में हुआ था जबकि दूसरा इबोला वायरस रोग का प्रकोप यामबुकु (वर्तमान डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में हुआ था। यह प्रकोप इबोला नदी के निकट स्थित एक गांव में फैला था, जिसके नाम पर इस बीमारी का नाम रखा गया।
इबोला रोग के लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं। इनमें बुखार, थकान, अस्वस्थता, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते तथा गुर्दे व यकृत की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्वास्थ्यकर्मियों और देखभाल से जुड़े कर्मचारियों के लिए इन लक्षणों की पहचान और निगरानी करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
--आईएएनएस
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