उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई आधार नहीं, सपा के साथ गठबंधन से हो सकता है फायदा: बृजभूषण शरण सिंह
गोंडा, 10 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कोई स्वतंत्र राजनीतिक हैसियत नहीं है और वह समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन करके ही चुनावी फायदा उठा सकती है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से जुड़े सवाल पर कहा, "उनकी स्वयं की अपनी कोई हैसियत नहीं है। वे समाजवादी पार्टी के कंधे पर सवार होकर ही कुछ सीटें जीत सकते हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की भी अपनी कोई हैसियत नहीं है। अब, अगर वे गठबंधन के तहत चुनाव लड़ते हैं, तो उन्हें कुछ फायदा हो सकता है।"
बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और कांग्रेस अपने सहयोगी समाजवादी पार्टी के साथ सीट-बंटवारे पर जल्द बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, समाजवादी पार्टी ने बृजभूषण शरण सिंह की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जब सपा सांसद राम गोपाल यादव से भाजपा नेता के बयान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हम उस पर क्या टिप्पणी कर सकते हैं? मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।"
कांग्रेस ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी संगठनात्मक स्थिति और समाजवादी पार्टी के साथ अपने संबंधों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करना चाहती है। उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने बीते दिनों कहा था कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव 'बराबरी और सम्मान' के साथ लड़ेगी।
दोनों पार्टियां पहले भी उत्तर प्रदेश में चुनावी गठबंधन कर चुकी हैं। हालांकि, 2017 के चुनावों में 'यूपी के दो लड़के' के नारे के साथ बने गठबंधन के उम्मीद के मुताबिक नतीजे न मिलने के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 2022 का विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा था।
2017 के गठबंधन समझौते के तहत कांग्रेस को उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 106 सीटें दी गई थीं। हालांकि, पार्टी केवल सात सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा, तो उसकी सीटों की संख्या और कम हो गई और पार्टी सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव आया। दोनों पार्टियों ने मिलकर संसदीय चुनाव लड़ा और राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से कुल 43 सीटें जीतीं।
--आईएएनएस
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