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असम: रुपाहीहाट में रावण के साथ जलाया गया कॉकरोच का पुतला

 

गुवाहाटी, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के नगांव जिले के रुपाहीहाट में दशहरा से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान रावण के पुतले के साथ एक कॉकरोच का पुतला भी जलाए जाने की खबर सामने आई है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को लेकर देशभर में चर्चा चल रही है। कॉकरोच सीजेपी का एक प्रमुख प्रतीक बन चुका है, जो युवा नेतृत्व वाला एक व्यंग्यात्मक आंदोलन है और सोशल मीडिया अभियानों तथा प्रदर्शनों के जरिए चर्चा में आया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में एक सजे हुए कार्यक्रम स्थल पर पुतले को आग के हवाले करते हुए देखा गया। वहां कॉकरोच की तस्वीर भी प्रदर्शित की गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक रावण के पुतले के साथ कॉकरोच का पुतला भी जलाया गया, हालांकि कार्यक्रम के आयोजकों, घटना की परिस्थितियों और इसके पीछे बताए गए उद्देश्य के बारे में तत्काल कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

भारत में कॉकरोच को राजनीतिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है। सीजेपी आंदोलन की शुरुआत भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई एक टिप्पणी के बाद हुई थी। इस टिप्पणी की आलोचना हुई और बाद में इसी से प्रेरित होकर अभिजीत दिपके ने व्यंग्यात्मक कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना की।

यह आंदोलन कॉकरोच को संघर्ष और जीवटता के प्रतीक के रूप में पेश करता है। इसके जरिए बेरोजगारी, आर्थिक असुरक्षा और युवाओं की आकांक्षाओं जैसे मुद्दों को उठाया जाता है।

हालांकि इसके नाम और सोशल मीडिया गतिविधियों को देखकर यह एक राजनीतिक दल जैसा लगता है, लेकिन इसके संस्थापक ने इसे पारंपरिक राजनीतिक पार्टी के बजाय युवाओं का एक दबाव समूह बताया है।

इस विवाद ने तब और ध्यान आकर्षित किया, जब इस सप्ताह दिल्ली के पीतमपुरा स्थित एक रामलीला समिति ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पारंपरिक पुतलों के साथ एक कॉकरोच का विशाल पुतला भी जलाया।

आयोजकों का कहना था कि कॉकरोच गंदगी और अस्वच्छता का प्रतीक है तथा यह पहल स्वच्छता अभियान से जुड़ी हुई थी, हालांकि सीजेपी के साथ कॉकरोच की पहचान जुड़ने के कारण इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी