कोयला मंत्रालय की यूपी को सलाह, बिजली संकट से बचने के लिए जल्द विकसित करें कैप्टिव कोयला ब्लॉक
नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। कोयला मंत्रालय ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश को सलाह दी कि वह अपने थर्मल पावर प्लांट के लिए लंबे समय तक ईंधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कोयले के बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए अपने कैप्टिव कोयला ब्लॉक के जल्द विकास को प्राथमिकता दे।
मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि हाल की मीडिया रिपोर्टों से पता चला है कि कोयला आपूर्ति में रुकावट के कारण उत्तर प्रदेश राज्य को बिजली की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
बयान में आगे कहा गया, "कोयला मंत्रालय वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने और राज्य को अपने कैप्टिव कोयला ब्लॉक के विकास में तेजी लाने की सलाह दोहराने के लिए निम्नलिखित तथ्य सामने रख रहा है, जबकि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) राज्य की कोयले की जरूरत को पूरी तरह से पूरा कर रहा है।"
कोयला मंत्रालय ने कहा कि 15 सितंबर तक उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (यूपीआरवीयूएनएल) का कोई भी थर्मल पावर प्लांट 'क्रिटिकल-स्टॉक' (कोयले की भारी कमी) श्रेणी में नहीं है। इसलिए मौजूदा स्टॉक की स्थिति से प्लांट के स्तर पर कोयले की उपलब्धता में किसी गंभीर कमी का संकेत नहीं मिलता है।"
मंत्रालय के अनुसार, झारखंड के दुमका जिले में स्थित सहारपुर जमरपानी कोयला ब्लॉक, जिसमें 973 मिलियन टन से ज्यादा का भंडार है, को कोयला मंत्रालय ने 2015 में 'कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015' के तहत यूपीआरवीयूएनएल को आवंटित किया था। इसका मकसद खास तौर पर इसके थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के लिए कोयले की जरूरत को पूरा करना था।
आवंटन के 10 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यूपीआरवीयूएनएल की ओर से जरूरी पहल न किए जाने के कारण इस ब्लॉक को चालू करने की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। मंत्रालय ने आगे कहा कि नतीजतन, उत्तर प्रदेश के पावर प्लांट की कोयले की पूरी जरूरत अभी भी सीआईएल द्वारा ही पूरी की जा रही है।
इस बीच, सहारपुर जमरपानी के आवंटन की तारीख या उसके बाद बिजली क्षेत्र में कैप्टिव इस्तेमाल के लिए आवंटित 14 अन्य कोयला ब्लॉक पहले ही चालू हो चुके हैं और उन्होंने अपने संबंधित प्लांट के लिए कोयले का उत्पादन शुरू कर दिया है।
यूपीआरवीयूएनएल के थर्मल पावर प्लांट में कोयले के स्टॉक की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। 1 सितंबर को स्टॉक 7.25 लाख टन (एलटी) था और 15 सितंबर तक यह बढ़कर 8.41 एलटी हो गया।
पिछले सात दिनों में, रोजाना औसतन लगभग 0.90 एलटी कोयला मिलने की मात्रा, रोजाना औसतन लगभग 0.83 एलटी की खपत से ज्यादा रही है, जिससे पता चलता है कि स्टॉक लगातार बढ़ रहा है।
मंत्रालय ने कहा, "अलग-अलग प्लांट पर अनलोडिंग की दिक्कतों की वजह से रेलवे को समय-समय पर रैक लगाने पर रोक लगानी पड़ती है, जिससे कोयले की सप्लाई और बढ़ाने में रुकावट आती है।"
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कोयले का स्टॉक 8 एलटी से ज्यादा होने के बावजूद यूपीआरवीयूएनएल के थर्मल पावर प्लांट का इस महीने का प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) सिर्फ 48 प्रतिशत के आसपास है। इसलिए इस महीने कम बिजली उत्पादन की वजह प्लांट पर कोयले की कमी नहीं हो सकती। उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य को अपने बिजली उत्पादन केंद्रों पर कामकाज से जुड़ी दिक्कतों को दूर करना होगा और उपलब्ध कोयले के स्टॉक का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगा।
--आईएएनएस
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