मध्य प्रदेश: बड़वानी में सरकारी सेवाओं में देरी पर सीएम ने 7 अधिकारियों को सस्पेंड किया
भोपाल/बड़वानी, 14 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को बड़वानी में 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' के तहत आयोजित जिला-स्तरीय शिकायत निवारण कार्यक्रम में नागरिकों को सरकारी सेवाएं और लाभ देने में देरी के लिए सात अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश दिया।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री की शिकायतकर्ताओं के साथ सीधी बातचीत के बाद की गई, जिसके दौरान उन्होंने जमीन के म्यूटेशन (नाम-अंतरण), आवास सहायता, कल्याणकारी भुगतान और पशुधन बीमा से जुड़े मामलों की समीक्षा की।
यादव ने तत्कालीन तहसीलदार आशा परमार और पटवारी मांगीलाल नरगावे और ललित बोरसे को तुरंत सस्पेंड करने का आदेश दिया। राजपुर तहसील के शिकायतकर्ता अजय-लाल ने बताया कि उन्होंने 2016 में अपने पिता की मृत्यु के बाद जमीन के म्यूटेशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन यह प्रक्रिया 2022 में पूरी हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत रजिस्ट्रेशन और भुगतान में देरी की भी शिकायत की थी। देरी को गंभीरता से लेते हुए यादव ने अधिकारियों को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया। परमार अभी धार जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात हैं।
एक अन्य मामले में, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत किश्त जारी करने में देरी के लिए दो पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारियों, मायाराम सोलंकी और जगदीश धाकड़, और असिस्टेंट इंजीनियर राजू डावर को सस्पेंड करने का आदेश दिया। शिकायतकर्ता रूपेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने 2019 में आवास योजना के तहत आवेदन किया था। हालांकि जियो-टैगिंग 2022 में पूरी हो गई थी और किश्त की प्रक्रिया 2023 में शुरू हुई थी, लेकिन उन्हें पहली किश्त 10 अगस्त को ही मिली, जब उनका घर पहले ही बन चुका था। यादव ने इंदौर में शहरी प्रशासन के संयुक्त निदेशक एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।
यादव ने कहा कि लोगों को उनके हक के फायदों के लिए एक सरकारी दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर नहीं लगवाए जाने चाहिए। शिकायतों के निपटारे में कोई भी गैर-जरूरी देरी मंजूर नहीं है।
मुख्यमंत्री ने 'संबल योजना' के तहत अंतिम संस्कार और अनुग्रह राशि देने में देरी के लिए जनपद पंचायत के तत्कालीन सीईओ सौरभ सिंह ठाकुर को सस्पेंड करने का भी आदेश दिया। शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2019 में मदद के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे मदद नहीं मिली थी। अधिकारियों ने पाया कि प्राथमिकता सूची में नीचे मौजूद 16 लाभार्थियों को पहले ही मदद मिल चुकी थी।
यादव ने 'मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना' और पशुधन बीमा के तहत भुगतान में देरी की जांच के आदेश दिए।
शुक्रवार देर रात सरकार के एक बयान के मुताबिक एक तहसीलदार, दो पटवारियों, दो मुख्य नगर पालिका अधिकारियों, एक असिस्टेंट इंजीनियर और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को सस्पेंड करने के निर्देश जारी किए गए।
--आईएएनएस
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