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मुख्यमंत्री विजय नवनिर्वाचित विधायकों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का करेंगे उद्घाटन

 

चेन्नई, 16 जून (आईएएनएस)। 17वीं तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए आधे से अधिक सदस्य पहली बार विधायक बने हैं, इसलिए राज्य सरकार ने उन्हें विधायी प्रक्रियाओं, संसदीय परंपराओं और विधानसभा के कामकाज से परिचित कराने के लिए दो दिन का ओरिएंटेशन और रिफ्रेशर प्रोग्राम आयोजित किया है।

नई बनी विधानसभा के पहले सत्र से पहले, चेन्नई के कलाईवानार अरंगम में 16 और 17 जून को ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय इस वर्कशॉप का उद्घाटन करेंगे। इसका मकसद विधायकों को विधानसभा के कामकाज और चुने हुए प्रतिनिधियों के तौर पर उनकी जिम्मेदारियों की बेहतर समझ देना है।

तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने बताया कि 17वीं विधानसभा के लिए चुने गए सभी सदस्यों को इस रिफ्रेशर कोर्स में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। दोनों दिन कलाईवानार अरंगम की तीसरी मंजिल पर सेशन होंगे।

सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए स्पीकर ने कहा कि यह ओरिएंटेशन प्रोग्राम खास तौर पर नए सदस्यों की मदद के लिए बनाया गया है, ताकि वे विधायी कामकाज से जुड़े नियमों, तौर-तरीकों और परंपराओं को समझ सकें।

इस वर्कशॉप में बहसों में असरदार तरीके से हिस्सा लेने, जनता से जुड़े मुद्दे उठाने, विधायी कामकाज और सदन के अंदर मर्यादा बनाए रखने के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

प्रभाकर ने कहा, "इस नए तरह के ट्रेनिंग प्रोग्राम का उद्घाटन मुख्यमंत्री विजय करेंगे। सदस्यों को विधानसभा में कैसा व्यवहार करना है और विधायिका से जुड़ी पुरानी संसदीय परंपराओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।"

उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के पूरे लाइव प्रसारण के बारे में जल्द ही फैसला लिया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विधायी कामकाज में जनता की भागीदारी भी बढ़ेगी।

यह ओरिएंटेशन प्रोग्राम 17वीं तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र की शुरुआत से कुछ दिन पहले हो रहा है। यह सत्र 18 जून को गवर्नर राजेंद्र अर्लेकर के सदन में संबोधन के साथ शुरू होगा, जिसमें नई चुनी गई सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं और विधायी एजेंडे की रूपरेखा बताई जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस रिफ्रेशर प्रोग्राम का मकसद यह पक्का करना है कि सदस्य विधानसभा सत्र के लिए अच्छी तरह तैयार हों और विधायी कामकाज की प्रक्रियात्मक जरूरतों से वाकिफ हों।

यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद नई विधानसभा में बड़ी संख्या में पहली बार विधायक बने सदस्य शामिल हुए हैं। ऐसे में संसदीय कामकाज और लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करने के लिए विधायी ट्रेनिंग एक अहम कदम है।

--आईएएनएस

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