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चाइल्ड पोर्नोग्राफी: सीबीआई कोर्ट ने यूपी सरकार के पूर्व इंजीनियर को 3 साल के लिए जेल भेजा

 

लखनऊ, 2 नवंबर (आईएएनएस)। लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग के एक पूर्व जूनियर इंजीनियर को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

सीबीआई अधिकारी ने एक बयान में कहा कि विशेष अदालत ने एक सह-दोषी को एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

31 अक्टूबर को दिए गए एक फैसले में विशेष सीबीआई अदालत ने सिंचाई विभाग के तत्कालीन जेई रामभवन को इलेक्ट्रॉनिक रूप में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सीएसएईएम) को प्रकाशित और प्रसारित करने के मामले में दोषी ठहराया। उसे तीन साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई।

सीबीआई ने बताया कि एक अन्य दोषी नीलेश बलिराम गोरे को एक साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 23 अप्रैल 2022 को आरोपियों के खिलाफ यह मामला दर्ज किया था। उन पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री को इकट्ठा करने, प्रसारित करने और प्रकाशित करने का आरोप था।

सीबीआई के अनुसार, जांच के दौरान महाराष्ट्र के भुसावल और जलगांव में तलाशी ली गई और डिजिटल उपकरणों को जब्त कर उनकी जांच की गई।

जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 30 दिसंबर 2022 को दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। विशेष सीबीआई अदालत ने 21 जुलाई 2026 को आरोप तय किए। मुकदमे के बाद, अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें सजा सुनाई।

बयान में कहा गया है कि सीबीआई बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े अपराधों की जांच और उन पर मुकदमा चलाने के लिए प्रतिबद्ध है। एजेंसी ऐसे मामलों को उच्च प्राथमिकता देती है और बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों और गरिमा का पूरा ध्यान रखती है।

एक अन्य मामले में, सीबीआई ने ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की एक शाखा में ग्राहकों के खातों से जुड़े 10.24 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की है।

यह मामला बैंक की 'सेक्टर पीआई' स्थित शाखा से जुड़ा है। बताया गया है कि एक आंतरिक जांच में संदिग्ध लेनदेन का पता चला, जिसमें बैंक के एक कर्मचारी और कई अन्य लोगों की कथित संलिप्तता सामने आई है।

शुरुआती जांच से पता चला है कि एक महिला कर्मचारी ने कथित तौर पर बैंक के अन्य अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करके ग्राहकों के खातों से अनधिकृत लेनदेन किए और रकम को अपने सहयोगियों से जुड़े खातों में ट्रांसफर कर दिया। ये कथित अनियमितताएं लगभग तीन साल तक किसी की पकड़ में नहीं आईं।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम