किराये में बदलाव की मांग को लेकर चेन्नई के ऑटो-रिक्शा चालक निकालेंगे कैंडललाइट मार्च
चेन्नई, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। ऑटो रिक्शा के किराए में संशोधन और चालकों की चिंताओं पर कार्रवाई को देखते हुए मंगलवार शाम को चेन्नई के एग्मोर से फोर्ट सेंट जॉर्ज तक फेडरेशन ऑफ ऑल ऑटो ट्रेड यूनियंस द्वारा निकाली जाने वाली कैंडललाइट मार्च का मुख्य केंद्र बिंदु होगा।
यह विरोध प्रदर्शन व्यासार्पडी के 61 वर्षीय ड्राइवर मोहम्मद इब्राहिम को श्रद्धांजलि देने के लिए भी आयोजित किया जाएगा। आत्महत्या करने से पहले, इब्राहिम ने एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से ऑटो किराए बढ़ाने का आग्रह किया था।
यूनियनों को उम्मीद है कि वे इस बात को उजागर कर पाएंगे कि बढ़ते खर्च और यात्रा के बदलते पैटर्न ने ड्राइवरों की जीविका कमाने और अपने परिवारों की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता को कैसे प्रभावित किया है।
फेडरेशन के समन्वयक एस. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि सरकार ने 2013 में किराए में संशोधन किया था। ईंधन की कीमतों, बीमा प्रीमियम और स्पेयर पार्ट्स की लागत में वृद्धि के बावजूद चालक उसी किराया संरचना के तहत काम कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि किराए में संशोधन में देरी से व्यक्तिगत चालकों पर बोझ पड़ा है, जिनकी आय बढ़ते खर्चों के कारण कम हो रही है। बालासुब्रमण्यम ने आरोप लगाया कि पहले के किराया संशोधनों के दौरान मीटर लागू करने को लेकर चालकों को परिवहन अधिकारियों और पुलिस द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।
इस बीच, उन्होंने कहा कि ओला, उबर और रैपिडो सहित ऐप-आधारित एग्रीगेटर सर्ज प्राइसिंग के माध्यम से अधिक किराया वसूलते हैं। फेडरेशन ने तर्क दिया कि इस असमानता के कारण व्यक्तिगत ऑपरेटरों को नुकसान हो रहा है और एक ऐसी किराया संरचना की मांग की जो ऑटो-रिक्शा चलाने की लागत को दर्शाती हो।
इसमें चेन्नई मेट्रो रेल के विस्तार, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और बाइक-टैक्सी सेवाओं के विकास को घटती आय का कारण बताया गया है और कहा गया है कि इन विकासों ने ऑटो राइड की मांग को प्रभावित किया है।
यूनियनों के अनुसार, बढ़ते घरेलू खर्च और चिकित्सा बिलों के साथ-साथ फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करने में देरी के कारण ड्राइवरों के लिए इस पेशे में बने रहना मुश्किल हो गया था। फेडरेशन ने कहा कि परिणामस्वरूप कई ड्राइवरों ने यह पेशा छोड़ दिया और अन्य नौकरियां कर लीं।
इसकी मांगों में मीटर के हिसाब से संशोधित किराया और ऑटो-रिक्शा के लिए सरकार समर्थित मोबाइल एप्लिकेशन शामिल हैं। फेडरेशन सरकार से बाइक-टैक्सी सेवाओं को विनियमित करने या प्रतिबंधित करने और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार को दूर करने की भी मांग करता है।
संघ ने कहा कि उसके प्रस्तावों का उद्देश्य ड्राइवरों पर वित्तीय और प्रशासनिक दबाव को कम करना है, जिससे वे वाहन रखरखाव खर्च और अन्य दायित्वों को पूरा करते हुए अपना काम जारी रख सकें।
इसने सरकार से तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि देरी से ड्राइवरों और परिवारों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। यूनियनों ने अपनी आजीविका को खतरे में डालने वाली समस्याओं के समाधान के लिए कदम उठाने की मांग की।
--आईएएनएस
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