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वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापनों पर सीसीपीए सख्त, होगर टेक्नोलॉजीज पर एक लाख रुपये का जुर्माना

 

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापनों और उत्पादों की ऐसी लिस्टिंग के लिए होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जिनमें उपकरणों की ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी और जरूरी लाइसेंस संबंधी जानकारी का खुलासा नहीं किया गया था।

रविवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आदेश सीसीपीए की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता में पारित किया गया। यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर वॉकी-टॉकी यानी पर्सनल मोबाइल रेडियो की लिस्टिंग, विज्ञापन और बिक्री से जुड़ी भ्रामक जानकारी तथा अनुचित व्यापार गतिविधियों के खिलाफ प्राधिकरण की जारी कार्रवाई का हिस्सा है।

सीसीपीए ने अपने ताजा आदेश में होगर टेक्नोलॉजीज की वेबसाइट पर प्रदर्शित विभिन्न मॉडल के वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों और उत्पाद लिस्टिंग की जांच की। प्राधिकरण ने पाया कि इन लिस्टिंग में उपकरणों की ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी, लागू लाइसेंस संबंधी शर्तों और नियामकीय मंजूरियों की जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई थी। इससे उपभोक्ताओं को यह गलतफहमी हो सकती थी कि जरूरी नियामकीय अनुमति के बिना भी इन उपकरणों का कानूनी रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।

नियमों के अनुसार, कम शक्ति और बहुत कम शक्ति वाले कम दूरी के रेडियो फ्रीक्वेंसी उपकरणों के इस्तेमाल के प्रावधानों के तहत 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज की निर्धारित फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करने वाले पर्सनल मोबाइल रेडियो को लागू शर्तों के अधीन लाइसेंस लेने से छूट प्राप्त है। हालांकि, इस छूट वाली रेंज से बाहर काम करने वाले अन्य वायरलेस रेडियो फ्रीक्वेंसी उपकरणों पर संबंधित नियामकीय आवश्यकताएं लागू होती हैं।

कार्यवाही के दौरान कंपनी ने दलील दी कि उसके पास वैध डीलर पजेशन लाइसेंस (डीपीएल) है और संबंधित उपकरणों के लिए जरूरी इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ईटीए) प्रमाणपत्र भी उपलब्ध हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उसकी वेबसाइट मुख्य रूप से जानकारी देने और संभावित ग्राहकों से संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई है तथा इस पर सीधे ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा नहीं है।

कंपनी की दलीलों, जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद सीसीपीए ने कहा कि नियामकीय मंजूरी होने भर से विज्ञापनदाता उपभोक्ताओं को खरीदारी से पहले सटीक, पूर्ण और महत्वपूर्ण जानकारी देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता।

प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी वेबसाइट पर ऑनलाइन भुगतान या शॉपिंग कार्ट की सुविधा नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि वहां किए गए प्रचार संबंधी दावे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। उत्पादों की बिक्री किसी भी माध्यम से हो, विज्ञापनों और उत्पाद लिस्टिंग में लागू नियामकीय शर्तों की पर्याप्त जानकारी देना जरूरी है।

सीसीपीए ने इससे पहले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य नियामकीय जानकारी के बिना बड़े पैमाने पर वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग और बिक्री का स्वतः संज्ञान लिया था। जांच के दौरान विभिन्न प्लेटफॉर्म पर नियमों का पालन नहीं करने वाली 16,970 से अधिक लिस्टिंग की पहचान की गई थी। इसके बाद अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो, मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस), जियोमार्ट, इंडिया मार्ट और ट्रेडइंडिया सहित 13 ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किए गए थे।

प्राधिकरण अब तक 12 कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश पारित कर चुका है और वॉकी-टॉकी से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों तथा अनुचित व्यापार गतिविधियों के लिए कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सीसीपीए के कुछ आदेशों और शुरू की गई कार्यवाही को अमेजन सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपकार्ट इंटरनेट और मेटा प्लेटफॉर्म्स जैसी कंपनियों ने न्यायिक मंचों पर चुनौती भी दी है।

--आईएएनएस

डीएससी