सीबीएसई मूल्यांकन विवाद: कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की
नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। सीबीएसई विवाद को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस ने सोमवार को सीबीएसई के उस इरादे पर भी सवाल उठाया, जिसमें ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली से संबंधित प्रक्रिया में कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार को दंडित करने की बात कही गई है।
पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग दोहराई। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री को न तो स्वयं और न ही अपने सहयोगियों को नैतिकता और सत्यनिष्ठा के किसी भी मानक के प्रति जवाबदेह मानते हुए देखा गया है। लेकिन शिक्षा मंत्री को अपना ‘राजधर्म’ निभाने के लिए इस्तीफा देना चाहिए।
बोर्ड द्वारा पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित उत्तर पुस्तिकाओं में विसंगतियों और अन्य खामियों से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई करने की बात कहने के एक दिन बाद रमेश ने कहा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में साइबर सुरक्षा खामियों से इनकार करने के बाद सीबीएसई ने आखिरकार स्वीकार किया है कि प्रणाली में खामियां थीं। लेकिन यह अपने ठेकेदार सीओईएमपीटी के खिलाफ क्या कार्रवाई करने जा रहा है?
ठेकेदार पर जुर्माना लगाने से संबंधित सीबीएसई की एक समाचार क्लिप संलग्न करते हुए रमेश ने कहा कि ऐसा लगता है कि सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय में सीओईएमपीटी से लाभ उठाने वाले लोग पहले से ही जानते थे कि सीओईएमपीटी इस काम के लिए सक्षम साबित नहीं होगा।
रमेश ने कहा कि अगस्त 2025 के अपने आरएफपी में सीबीएसई ने काम को प्रभावी ढंग से पूरा करने में विफल रहने वाले विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार सुरक्षित रखा था। लेकिन सितंबर में सीबीएसई ने एक शुद्धिपत्र जारी कर विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट करने का अपना अधिकार वापस ले लिया।
रमेश ने कहा कि यह सीओईएमपीटी को बचाने का एक समझ से परे, सरकार समर्थित प्रयास प्रतीत होता है, जो सीओईएमपीटी को आधिकारिक तौर पर अनुबंध मिलने से पहले ही शुरू हो गया था।
--आईएएनएस
एमएस/