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केरल: विषु विज्ञापन विवाद में होटल के खिलाफ मामला दर्ज, जांच जारी

 

अलप्पुझा, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल के चेरथला में एक विवादित विषु विज्ञापन को लेकर स्थानीय पुलिस ने मेहर मंडी और ग्रिल्स के मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब एक कथित रूप से भड़काऊ पोस्टर को लेकर व्यापक विरोध सामने आया, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के साथ एक नॉन-वेज डिश को दर्शाया गया था।

यह विवादित पोस्टर रेस्तरां के त्योहार प्रमोशन के तहत जारी किया गया था, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद लोगों में नाराजगी फैल गई और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, साथ ही होटल के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी।

पुलिस ने इससे पहले होटल से जुड़े दो लोगों को हिरासत में लिया था, जिन्होंने कथित तौर पर इस वायरल पोस्टर को साझा किया था। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है, जिसमें धार्मिक भावनाएं आहत करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की आशंका जताई गई है।

चेरथला पुलिस स्टेशन से जुड़े एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि होटल के कुल नौ मालिक हैं। अधिकारी ने कहा, “इस विवादित पोस्टर को साझा करने वाले दो लोग हिरासत में हैं। जांच टीम पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। होटल आज नहीं खुला है और हम जांच को आगे बढ़ा रहे हैं।”

अलप्पुझा जिले के चेरथला से सामने आया यह मामला जल्द ही कानून-व्यवस्था का मुद्दा बन गया। कई लोगों ने इस चित्रण को विशेष रूप से विषु के दौरान हिंदू परंपराओं के प्रति अपमानजनक बताया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इस पोस्टर की सामग्री में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की क्षमता थी, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया।

विवाद बढ़ने के बीच, होटल प्रबंधन ने इंस्टाग्राम पर एक माफी वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने इस पूरे विवाद को “डिजाइनर की गलती” बताया और कहा कि पोस्टर का डिजाइन बाहरी एजेंसी से बनवाया गया था।

वीडियो में प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि उनका कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था और उन्होंने इस घटना पर खेद व्यक्त किया।

इससे पहले भी होटल मालिकों ने एक बयान जारी कर कहा था कि डिजाइन थर्ड पार्टी एजेंसी द्वारा तैयार किया गया था और यह चूक जानबूझकर नहीं बल्कि निर्णय की कमी के कारण हुई।

हालांकि, स्पष्टीकरण और माफी के बावजूद प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई जारी रखी है, जिससे इस मामले की गंभीरता स्पष्ट होती है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इस विज्ञापन की अवधारणा कैसे तैयार की गई और इसे जारी करने की मंजूरी किस तरह दी गई।

यह घटना एक बार फिर त्योहारों के दौरान व्यावसायिक प्रचार में धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर संवेदनशीलता को उजागर करती है। साथ ही, इसने इस तरह के मामलों में अधिक जवाबदेही और निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

--आईएएनएस

डीएससी