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भारत के लिए भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बनना चाहता है कनाडा, सीईपीए पर पांचवें दौर की बातचीत जारी (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

 

वॉशिंगटन, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। कनाडा खुद को भारत के लिए लंबे समय तक ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और एयरोस्पेस उत्पादों की सप्लाई करने वाले भरोसेमंद साझेदार के रूप में पेश कर रहा है। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और कनाडा के बीच एक बड़े व्यापार समझौते को लेकर पांचवें दौर की बातचीत चल रही है।

ग्लोबल अफेयर्स कनाडा ने आईएएनएस के एक सवाल के जवाब में कहा, "भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और उसकी अर्थव्यवस्था करीब सात प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है। कनाडा और भारत के बीच व्यापार और निवेश के बड़े मौके हैं, जिनसे दोनों देशों की कंपनियों और कामगारों को फायदा हो सकता है।"

यह बयान ऐसे समय आया है, जब कनाडा और भारत के अधिकारी इस सप्ताह कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) को लेकर पांचवें दौर की बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों ने 2026 के अंत तक इस समझौते पर बातचीत पूरी करने का लक्ष्य रखा है।

ग्लोबल अफेयर्स कनाडा ने कहा कि मौजूदा बातचीत को कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू की दो सप्ताह पहले हुई मुंबई यात्रा और जी20 के दौरान भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ उनकी बातचीत से भी रफ्तार मिली है। दोनों मंत्रियों ने पिछले सप्ताह मिलवॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान मुलाकात की थी। इस दौरान मौजूदा दौर की वार्ता से पहले सीईपीए पर अब तक हुई प्रगति को लेकर चर्चा हुई।

कनाडा सरकार के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में हुई बातचीत से भी इस वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। उस समय सिद्धू ने व्यापार और निवेश फोरम के लिए पीयूष गोयल और भारत के एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की थी।

भारत के साथ संबंधों में ऊर्जा कनाडा के लिए एक अहम क्षेत्र बनकर उभर रही है। ग्लोबल अफेयर्स कनाडा ने कहा, "2035 तक भारत की ऊर्जा जरूरतों में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और कनाडा इन जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार है।"

कनाडा ने एलएनजी कनाडा फेज 2 प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया। उसके मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए 33 अरब डॉलर का निवेश हासिल किया गया है और इसकी मदद से कनाडा अगले पांच साल में दुनिया के पांच सबसे बड़े एलएनजी निर्यातक देशों में शामिल हो सकता है।

कनाडा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। कनाडा सरकार के मुताबिक, मार्च में भारत और कनाडा की यूरेनियम उत्पादक कंपनी कैमेको के बीच 2.6 अरब डॉलर का समझौता हुआ। इसके तहत 2035 तक भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए करीब 22 मिलियन पाउंड यूरेनियम की सप्लाई की जाएगी।

एयरोस्पेस एक और ऐसा क्षेत्र है, जिसमें कनाडा भारत के साथ बड़े कारोबारी मौके देख रहा है। ग्लोबल अफेयर्स कनाडा ने कहा क‍ि भारत को आने वाले वर्षों में 2,000 नए विमानों की जरूरत होगी और कनाडा की एयरोस्पेस इंडस्ट्री इनकी सप्लाई के लिए तैयार है।

ऊर्जा से लेकर महत्वपूर्ण खनिज और एयरोस्पेस तक, कनाडा भारत का भरोसेमंद साझेदार बनने के लिए तैयार है।

कनाडा सरकार के मुताबिक, मनिंदर सिद्धू की कोशिश ऐसा व्यापार समझौता करने की है, जिससे दोनों देशों की कंपनियों और कामगारों के लिए नए मौके खुलें और भारत-कनाडा के बीच लंबे समय के आर्थिक रिश्ते मजबूत हों। भारत और कनाडा ने 2030 तक दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है।

कनाडा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 30.4 अरब डॉलर रहा। इसमें 13.6 अरब डॉलर का वस्तुओं का व्यापार शामिल था। भारत को कनाडा का वस्तुओं का निर्यात 3.9 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत से कनाडा का आयात 9.7 अरब डॉलर था।

दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब भारत-कनाडा संबंधों में भी सुधार देखने को मिल रहा है।

कनाडा 12 से 17 अक्टूबर तक भारत में 'टीम कनाडा ट्रेड मिशन' भेजने की भी तैयारी कर रहा है। इसके जरिए कनाडा भारत के साथ कारोबारी रिश्तों को बढ़ाना चाहता है और अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करते हुए दूसरे देशों में भी व्यापार के मौके तलाश रहा है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम