पश्चिम बंगाल : दुर्गा पूजा बुकस्टॉल तोड़फोड़ मामले में सीपीआई-एम को झटका, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
कोलकाता, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट की एक सिंगल-जज वेकेशन बेंच ने मंगलवार को सीपीआई (एम) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में दुर्गा पूजा पंडालों के पास उसके बुकस्टॉल में की गई तोड़फोड़ के लिए मुआवजे की मांग की गई थी।
दक्षिण कोलकाता की सीपीआई-एम की जादवपुर एरिया कमेटी ने मुआवजे की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद, मंगलवार दोपहर को जस्टिस पार्थ प्रतीम रॉय की सिंगल-जज वेकेशन बेंच ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की।
सुनवाई के अंत में जस्टिस रॉय ने कहा कि सीपीआई-एम के बुक स्टॉल से जुड़ी एक ऐसी ही याचिका पहले से लंबित है, जिस पर अगले साल जनवरी में कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच सुनवाई करेगी।
जस्टिस रॉय ने कहा कि इस मामले पर किसी वेकेशन बेंच द्वारा अलग से सुनवाई करने की कोई आवश्यकता नहीं है, और इसके साथ ही उन्होंने याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान, जस्टिस रॉय ने यह भी याद दिलाया कि पूजा पंडाल के पास सीपीआई-एम के बुक स्टॉल को हटाने से जुड़े एक ऐसे ही मामले में, मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे की डिवीजन बेंच ने कहा था कि पुलिस की अनुमति के बिना लगाए गए स्टॉल को चलने नहीं दिया जाना चाहिए और पुलिस को ऐसे स्टॉल हटा देने चाहिए।
दुर्गा पूजा के दौरान, त्योहार शुरू होने के बाद से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में (कोलकाता भी शामिल) सीपीआई-एम द्वारा लगाए गए बुकस्टॉलों में तोड़फोड़ किए जाने के आरोप सामने आए हैं। सप्तमी की रात को, जादवपुर इलाके में भी सीपीआई (एम) के दो बुकस्टॉलों में तोड़फोड़ की गई। इस घटना को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
कई बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने सीपीआई (एम) के बुकस्टॉलों में हुई तोड़फोड़ की घटनाओं की निंदा की है। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने इस घटना की निंदा की और कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं, बल्कि शर्मनाक भी हैं।
उन्होंने कहा, "अगर यह कोई इकलौती घटना होती, तो मैं समझ सकता था। लेकिन, ऐसा तीन-चार जगहों पर हुआ है। मैं इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं कर सकता। वामपंथी दलों के साथ हमारे वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हें किताबें क्यों नहीं बेचने देते? वे कौन हैं? उन्हें यह अधिकार किसने दिया? ऐसी हरकतें निंदनीय हैं। मुझे शर्म आ रही है। उम्मीद है कि ऐसा दोबारा कभी नहीं होगा।"
--आईएएनएस
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