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यस बैंक को लेकर ब्रोकिंग फर्मों ने अपनाया सतर्क रुख, शेयर फिसले

 

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। यस बैंक के शेयरों में शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट द्वारा 8,415 करोड़ रुपए के 'एडिशनल टियर-1' (एटी-1) बॉन्ड को राइट-ऑफ रद्द करने के फैसले को बरकरार रखने के बाद ब्रोकिंग फर्मों का यह बैंक को लेकर सतर्क रुख अपनाना है।

ब्रोकिंग फर्मों ने चेतावनी दी है कि इससे बैंक की पूंजी और बुक वैल्यू पर दबाव पड़ सकता है।

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म 'सिटी' के एनालिस्ट्स ने यस बैंक पर अपनी 'बिकवाली' की रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस घटाकर 17.50 रुपए कर दिया है।

इसी तरह, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मॉर्गन स्टेनली ने भी अपनी 'अंडरवेट' रेटिंग को बनाए रखा है और इसका टारगेट प्राइस 17 रुपए तय किया है। कोर्ट के इस फैसले के चलते स्टॉक में भारी बिकवाली देखने को मिली।

सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया है, जो बॉम्बे हाई कोर्ट के 20 जनवरी, 2023 के फैसले के खिलाफ दायर की गई थीं। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में एटी-1 बॉन्ड के 'राइट-डाउन' को रद्द कर दिया था। ये बॉन्ड मार्च 2020 में बैंक को बचाने की प्रक्रिया के दौरान खत्म कर दिए गए थे।

सिटी के अनुसार, एटी-1 बॉन्ड के राइट-डाउन को पलटने से पूंजी से जुड़ी चिंताएं फिर से पैदा हो गई हैं।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि इस फैसले के चलते यस बैंक के 'कॉमन इक्विटी टियर 1' (सीईटी1) कैपिटल रेशियो में 250 आधार अंक की कमी आ सकती है और यह घटकर 11.5 प्रतिशत पर आ सकता है। यह अनुमान केवल मूल राशि पर आधारित है और इसमें यह मानकर चला गया है कि कूपन भुगतान स्वैच्छिक हैं और नॉन-क्यूमुलेटिव हैं।

ब्रोकरेज का यह भी अनुमान है कि इस संभावित देनदारी से बैंक की बुक वैल्यू 13-14 प्रतिशत तक कम हो सकती है, जिसके चलते कैपिटल बफर को बहाल करने के लिए बैंक को अतिरिक्त पूंजी जुटानी पड़ सकती है।

इसका अंतिम असर कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इस फैसले को कैसे लागू किया जाता है और बकाया बॉन्ड के साथ क्या व्यवहार किया जाता है।

दोपहर 3 बजे यस बैंक का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 2.21 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17.72 रुपए पर था।

--आईएएनएस

एबीएस