ब्रिक्स के संसदीय मंच ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की, सीमा पार आतंकवाद से मुकाबले का आह्वान
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स सदस्य देशों ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 2025 में हुए आतंकवादी हमले की एक बार फिर कड़ी निंदा की और सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण तथा आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से मुकाबले की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के समापन पर जारी संयुक्त घोषणा में भारत सहित ब्रिक्स सदस्य देशों ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता सुनिश्चित करने का आह्वान किया। साथ ही, आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों को खारिज किया।
संयुक्त घोषणा में कहा गया, “हम आतंकवाद के किसी भी कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं। ऐसे कृत्य आपराधिक और अनुचित हैं तथा उनकी प्रेरणा चाहे जो भी हो, वे कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा किए गए हों, स्वीकार्य नहीं हैं। हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए।”
घोषणा में कहा गया कि ब्रिक्स सदस्य देश सीमा पार आतंकवादियों की आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इसमें कहा गया, “हम दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल सभी लोगों और उन्हें समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए तथा संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। हम आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता सुनिश्चित करने का आह्वान करते हैं और इससे निपटने में दोहरे मानदंडों को खारिज करते हैं।”
ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्य समूह (सीटीडब्ल्यूजी) और उसके पांच उपसमूहों की गतिविधियों का भी स्वागत किया। ये समूह ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी रणनीति, ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्ययोजना और कार्य समूह के स्थिति पत्र के आधार पर काम करते हैं।
प्रतिनिधियों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और गहरा करने की उम्मीद जताई। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को शीघ्र अंतिम रूप देकर अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने पर भी जोर दिया।
ब्रिक्स संसदीय मंच ने पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। सदस्यों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने का आह्वान किया, जिनसे स्थिति और बिगड़ सकती है। घोषणा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप आम नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसमें देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
ब्रिक्स देशों ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से दीर्घकालिक सहमति बनाने के प्रयास तेज करने की अपील की, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। मंच ने वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। यह प्रयास लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप किए जाने चाहिए।
संयुक्त घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा दंडात्मक उपायों की भी निंदा की गई। इसमें एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और द्वितीयक प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे कदम लक्षित देशों की आम आबादी के मानवाधिकारों पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। घोषणा के अनुसार, इन प्रभावों में विकास के अधिकार, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकार भी शामिल हैं। ब्रिक्स सदस्यों ने ऐसे गैरकानूनी उपायों को समाप्त करने का आह्वान किया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों एवं उद्देश्यों को कमजोर करते हैं।
गौरतलब है कि पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शीर्ष नेताओं ने पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा की थी। उस दौरान अपनाई गई 'नई दिल्ली घोषणा 2026' में भी सीमा पार आतंकवादियों की आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण, आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने और आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया था।
--आईएएनएस
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