ब्रिक्स सम्मेलन सदस्य देशों के बीच के सहयोग को भारतीय कारोबारियों के लिए ठोस लाभ में बदलने का मौका: पीएचडीसीसीआई
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस) 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए उभरते बाजारों के साथ आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने और सदस्य देशों के बीच सहयोग को भारतीय कारोबारों के लिए ठोस लाभ में बदलने का अवसर प्रदान करता है। यह बयान गुरुवार को पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने दिया।
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि ब्रिक्स की सफलता का आकलन अंततः इस आधार पर किया जाना चाहिए कि क्या यह कंपनियों के लिए सीमा-पार व्यापार और निवेश को सस्ता, तेज और आसान बनाता है।
उन्होंने कहा कि भारत को सीमा-पार कारोबार में आने वाली व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक तंत्र बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, दस्तावेजीकरण, मानक और नियामकीय आवश्यकताएं शामिल हैं। ब्रिक्स व्यापार बाधा समाधान तंत्र कंपनियों को ऐसी समस्याओं की रिपोर्ट करने, उन्हें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके समाधान की निगरानी करने की सुविधा दे सकता है। इससे व्यापार सुगमता से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को कारोबारों के लिए एक व्यावहारिक उपकरण में बदला जा सकेगा।
जुनेजा ने भारतीय रुपए सहित राष्ट्रीय मुद्राओं के जरिए सीमा-पार व्यापार को बढ़ावा देने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इससे लेनदेन की लागत और कुछ भुगतान जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए बैंकिंग चैनल, कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग व्यवस्था और विभिन्न मुद्राओं में लेनदेन के निपटान के व्यावहारिक तंत्र विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि उद्देश्य एकल ब्रिक्स मुद्रा बनाना नहीं, बल्कि कारोबारों को भुगतान के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना होना चाहिए।
पीएचडीसीसीआई ने सीमा-पार लेनदेन के लिए भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के अधिक इस्तेमाल की भी वकालत की। ब्रिक्स देशों की भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के साथ इंटरऑपेरेबल क्यूआर भुगतान, तेज मनी ट्रांसफर और साझा तकनीकी मानकों से छोटे निर्यातकों, सेवा प्रदाताओं और मध्यम आकार के कारोबारों को फायदा हो सकता है।
जुनेजा ने कहा कि छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए वित्त तक पहुंच भी प्राथमिकता होनी चाहिए। छोटे निर्यातकों के लिए ऑर्डर मिलने के बाद वित्त जुटाना और भुगतान में देरी को संभालना उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जितना खरीदार ढूंढना। जयपुर कंसेंसस के आधार पर भारत ऐसे तंत्र को आगे बढ़ा सकता है, जो इनवॉइस फाइनेंसिंग और ट्रेड फाइनेंस की सुविधा प्रदान करें। इसमें ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) के साथ संभावित जुड़ाव भी शामिल है।
उद्योग संगठन ने मानकों और प्रमाणन के क्षेत्र में भी अधिक सहयोग की मांग की। पीएचडीसीसीआई ने कहा कि घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उत्पादों को भी अन्य ब्रिक्स बाजारों में अतिरिक्त परीक्षण और मंजूरी का सामना करना पड़ सकता है। फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, रसायन, कपड़ा और मेडिकल डिवाइस जैसे क्षेत्रों में सेक्टर-विशिष्ट व्यवस्थाएं इन लागतों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
--आईएएनएस
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