एसआईआर पर सवाल उठाने वालों को राष्ट्र विरोधी बताना गंभीर विसंगतियों को छिपाने की कोशिश: कोटा नीलिमा
हैदराबाद, 3 नवंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) की उपाध्यक्ष डॉ. कोटा नीलिमा ने कहा कि भाजपा का नया अभियान नागरिकों को डरा-धमकाकर और उन्हें राष्ट्र विरोधी करार देकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मौजूद गंभीर विसंगतियों को छिपाने की एक कोशिश है।
सोमवार को हैदराबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू किए गए 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान का जिक्र करते हुए नीलिमा ने कहा कि यह अभियान एसआईआर प्रक्रिया को लेकर नागरिकों की वास्तविक चिंताओं को दूर करने के बजाय उन्हीं नागरिकों को निशाना बनाता है।
उन्होंने एक बयान में कहा, "अपने चिर-परिचित अहंकारी अंदाज में भाजपा एसआईआर पर सवाल उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को राष्ट्र विरोधी करार देने की कोशिश कर रही है। यह उन नागरिकों, राजनीतिक दलों और नेताओं को डराने की एक सोची-समझी कोशिश है, जिन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर ठोस सबूतों के साथ जायज आपत्तियां उठाई हैं।"
रविवार को दिल्ली में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में शामिल हुईं। नीलिमा ने कहा कि जनता की भारी प्रतिक्रिया से भाजपा घबरा गई है। उन्होंने कहा, "इस ऐतिहासिक रैली के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में लाखों लोग पहुंचे, जिससे भाजपा गहरी चिंता में है। इसके जवाब में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में एक छोटी सी पदयात्रा निकाली, जिसमें उन्होंने देश के उन नागरिकों को ही दोषी ठहराया जो अपने वोट के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। भाजपा पूरी तरह से यह भूल गई है कि क्या सही है और क्या गलत।"
टीपीसीसी नेता ने बताया कि 1 नवंबर को दिल्ली में 'वोट चोरी' के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व वाले मार्च में देशभर से लाखों समर्थक शामिल हुए, जिसमें 20 से अधिक विपक्षी दल एकजुट होकर खड़े थे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इस रैली का नेतृत्व किया। उन्होंने एसपी, आरजेडी, टीएमसी, एनसीपी(एसपी), शिवसेना (यूबीटी), पीडीपी, जेकेएनसी, वामपंथी दलों और अन्य पार्टियों के इंडिया ब्लॉक के नेताओं के साथ मंच साझा किया।
संयुक्त विपक्ष ने कहा कि 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 14 प्रतिशत हैं, के नाम हटाना हमारे लोकतंत्र पर सीधा हमला है, जो लोगों से उनका वोट देने का अधिकार छीन लेता है।
--आईएएनएस
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