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'दोहरा मापदंड और पब्लिसिटी स्टंट', ठाकरे बंधुओं के 'गर्जना मोर्चा' पर भाजपा-शिवसेना का तंज

 

मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा और शिवसेना ने रविवार को दावा किया कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में विपक्ष द्वारा भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के खिलाफ निकाला गया 'गर्जना मोर्चा' दोहरे मापदंडों का प्रदर्शन और एक पब्लिसिटी स्टंट है।

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला करते हुए उनके कार्यक्रम को 'गर्जना मार्च' के बजाय "कोल्हे-कुई मार्च (सियारों की आवाज)" बताया।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने इस प्रदर्शन के समय को विश्व पशु दिवस से जोड़ा। विपक्षी दलों पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद उनकी शिकायतें 'अंगूर खट्टे हैं' वाली मानसिकता को दिखाती हैं।

उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे सहित विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए याद दिलाया कि इन नेताओं ने पहले ईवीएम से हुए चुनावों में जीत हासिल की है।

उन्होंने कहा, "उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 2007, 2012 और 2017 में ईवीएम के जरिए हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में जीत हासिल की थी। राज ठाकरे की पार्टी ने भी 2009 में ईवीएम से हुए मतदान के जरिए अपने सबसे ज्यादा विधायक जिताए थे। ईवीएम लागू करने का फैसला मूल रूप से कांग्रेस की सरकार के दौरान लिया गया था और उस समय मिली चुनावी जीत पर कांग्रेस ने कभी सवाल नहीं उठाए।"

मंत्री शेलार ने कहा, "जब विपक्षी दल जीतते हैं, तब ईवीएम और चुनाव आयोग उन्हें निष्पक्ष लगते हैं। लेकिन जब वे हारते हैं, तो मशीनों और प्रशासनिक संस्थाओं को दोष देते हैं। जनता इस तरह के दोहरे रवैये को स्वीकार नहीं करेगी।"

चुनावी संस्थाओं पर पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री आशीष शेलार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुए छह राज्यों के चुनावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में गैर-भाजपा दलों ने सरकार बनाई जबकि पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में एनडीए को जनादेश मिला।

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी मांगों पर उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। उन्होंने विपक्ष की पुरानी मांगों और मौजूदा रुख में विरोधाभास होने का भी दावा किया।

उन्होंने कहा, "मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अक्टूबर 2025 में मतदाता सूची की गड़बड़ियों पर चिंता जताई थी और 96 लाख फर्जी मतदाता होने का आरोप लगाते हुए नगर निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची में सुधार की मांग की थी। नवंबर 2025 में शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए एक से ज्यादा जगह दर्ज मतदाताओं की जांच की मांग की थी। जनवरी 2026 में भी ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी।"

उन्होंने सवाल किया, "अब जब चुनाव आयोग एसआईआर प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूचियों को सही और सुरक्षित बनाने का काम कर रहा है, तो विपक्षी नेता इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?"

मंत्री शेलार ने विपक्ष के आंदोलन को "रोने-धोने वाला मार्च" बताया और विपक्षी नेताओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय मतदाताओं के जनादेश को स्वीकार करने की अपील की।

इस बीच, शिवसेना के मंत्री संजय शिरसाट ने ठाकरे बंधुओं के 'गर्जना मोर्चा' का मजाक उड़ाते हुए इसे टी-शर्ट के जरिए किया गया पब्लिसिटी स्टंट बताया। उन्होंने कहा कि इसका मकसद केवल दोनों भाइयों को एक साथ दिखाना है।

छत्रपति संभाजीनगर में मौजूद सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा, "मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शन से ज्यादा चर्चा दोनों भाइयों के एक साथ आने की है। एक जैसी टी-शर्ट पहनकर माहौल बनाने की यह सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट है।"

उन्होंने आगे सवाल किया, "आप इसे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बता रहे हैं, लेकिन क्या किसी एक भी राजनीतिक दल ने आपका समर्थन किया? यह भी बताइए कि इसका नेतृत्व किसके हाथ में है, उद्धव के या राज के?"

संजय शिरसाट ने कहा, "यह सिर्फ एक कार्यक्रम है और इसे ज्यादा समर्थन नहीं मिलने वाला। टी-शर्ट बांटकर यह रैली निकाली गई है। वे किस 'गर्जना' की बात कर रहे हैं? यह केवल हाथ पकड़कर फोटो खिंचवाने का मौका है। अगर आप गंभीर हैं तो जंतर-मंतर जाइए और 'चलो दिल्ली' का आह्वान कीजिए। वे जानते हैं कि उनका रुख टिकने वाला नहीं है, इसलिए बेवजह यह सब कर रहे हैं। क्या शरद पवार या किसी अन्य नेता ने उनका समर्थन किया? क्या उनका कोई नेता इसमें शामिल हुआ?"

उन्होंने कहा, "यही लोग सीजेपी का विरोध करते थे। क्या यह अपनी सफलता दिखाने के लिए है या फिर यह उनके अस्तित्व की लड़ाई है? क्या संजय राउत के बोलने भर से लोग उनकी मर्जी के मुताबिक आते-जाते रहेंगे? कोई भी मांग उचित होनी चाहिए। अगर ज्ञानेश कुमार से जुड़ी मांग सही है, तो केंद्र सरकार उस पर विचार करेगी।"

--आईएएनएस

एएमटी/पीएम