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ओडिशा कस्टोडियल डेथ मामला: बीजेडी ने बनाई फैक्ट फाइंडिंग टीम, नवीन पटनायक को सौंपेगी रिपोर्ट

 

भुवनेश्वर, 2 जून (आईएएनएस)। विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजेडी) ने मंगलवार को एक फैक्ट फाइंडिंग टीम बनाई, जो ओडिशा के गंजाम जिले के कबीसूर्यनगर पुलिस स्टेशन में कस्टडी में दी गई यातना के कारण 32 साल के एक दिव्यांग व्यक्ति की मौत की जांच करेगी।

पार्टी द्वारा जारी बयान के मुताबिक, यह टीम पीड़ित के पैतृक गांव जाएगी और उसके परिवार के सदस्यों तथा अन्य लोगों से मिलकर इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाएगी।

बयान में कहा गया है, "बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक की मंजूरी से गंजाम जिले के कबीसूर्यनगर पुलिस स्टेशन में कस्टडी में हुई मौत के मामले में सुशांत साहू के परिवार से मिलने के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग टीम का गठन किया गया है। यह टीम पीड़ित के परिवार से मिलेगी, घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाएगी, स्थानीय निवासियों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत करेगी और पटनायक को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।"

17 सदस्यों वाली इस फैक्ट-फाइंडिंग टीम में बीजेडी के वरिष्ठ नेता रमेश च्यौ पटनायक, भृगु बक्सीपात्र, प्रमिला बिसोई, रंजीता साहू, लतिका प्रधान, पूर्ण चंद्र स्वाइन आदि शामिल हैं।

इस क्षेत्रीय पार्टी ने घटना से जुड़े आरोपों पर गहरी चिंता भी व्यक्त की है और मानवाधिकारों की रक्षा करने, पीड़ितों को न्याय दिलाने और कानून के शासन को बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पार्टी ने कहा कि इस मुश्किल समय में वह पीड़ित परिवार के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ी है।

परिवार के सदस्यों के आरोपों के अनुसार, पीड़ित सुशांत साहू गंजाम जिले के सुबालेया गांव का रहने वाला था। सुशांत साहू को 25 मई को एक छापेमारी के दौरान कबीसूर्यनगर पुलिस स्टेशन लाया गया था और अवैध पत्थर विस्फोट (स्टोन ब्लास्टिंग) से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया था। इससे पहले इसी मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, सुशांत की संलिप्तता साबित नहीं हुई थी। आरोप है कि सात दिनों की हिरासत के दौरान उसे कस्टडी में यातना दी गई।

उसे रविवार को गंभीर हालत में उसके परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया। आस्का अस्पताल में शुरुआती इलाज मिलने के बाद उन्हें बेरहामपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां सोमवार को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से भारी आक्रोश फैल गया, जिसके चलते तीन पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और एक अंडर-ट्रेनिंग आईपीएस अधिकारी को, जिसके पास कबीसूर्यनागर पुलिस स्टेशन का स्वतंत्र प्रभार था, वापस बुला लिया गया।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी