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बेंगलुरु यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पर छात्र को 'आतंकवादी' कहने का आरोप, भारी दबाव के बीच निलंबित

 

बेंगलुरु, 28 मार्च (आईएएनएस)। बेंगलुरु पुलिस ने शनिवार को शहर की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आरोप है कि प्रोफेसर ने क्लासरूम सेशन के दौरान एक मुस्लिम छात्र को आतंकवादी कहा।

गिरिनगर पुलिस ने बीएनएस की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य) और 352 (शांति भंग करने की मंशा से किया गया जानबूझकर अपमान) में केस दर्ज किया है।

आरोपी की पहचान प्रोफेसर मुरलीधर देशपांडे के रूप में हुई है, जो शहर के पीईएस विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक आक्रोश के चलते उन्हें उसी दिन निलंबित कर दिया गया।

खबरों के मुताबिक, यह घटना 24 मार्च को यहां बनशंकरी रिंग रोड स्थित विश्वविद्यालय परिसर में हुई थी। यह मामला तब सामने आया, जब एक छात्र द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो वायरल हो गया।

आरोप है कि देशपांडे ने एक लेक्चर के दौरान अफ्फान नाम के एक मुस्लिम छात्र को बार-बार निशाना बनाया और करीब 60 छात्रों की मौजूदगी में उसे कम से कम 13 बार आतंकवादी कहकर संबोधित किया। पुलिस ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।

चूंकि इस मामले में धार्मिक भावनाओं कोठेस पहुंचाने का आरोप था और इससे सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की संभावना थी, इसलिए पुलिस अधिकारी ने कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की।

प्रोफेसर ने छात्र से कहा, "ईरान युद्ध तुम जैसे लोगों की वजह से हुआ", "ट्रंप तुम्हें ले जाएगा" और "तुम बेवकूफ हो, तुम नरक में जाओगे" जैसी टिप्पणी शामिल है। छात्रों के अनुसार, इन बयानों ने क्लासरूम में एक शत्रुतापूर्ण और अपमानजनक माहौल पैदा कर दिया था।

वायरल हो रहे वीडियो में प्रोफेसर को छात्र को निशाना बनाते हुए और कक्षा के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए दिखाया गया है। इस घटना की कड़ी आलोचना हुई है और कई लोगों ने इसे शैक्षणिक परिवेश में धार्मिक भेदभाव और घृणास्पद भाषण करार दिया है।

एक और घटनाक्रम में आरोप है कि कक्षा से सीसीटीवी फुटेज को हटा दिया गया था, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

इसके अतिरिक्त, कुछ छात्रों को जिन्होंने पीड़ित के समर्थन में बात की थी, उन्हें निलंबित कर दिया गया था, जिसका आधिकारिक कारण "कक्षा के दौरान बात करना" बताया गया।

सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर ने बाद में कॉलेज प्रशासन को लिखित माफीनामा जारी किया, लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर छात्र से माफी नहीं मांगी। बताया जा रहा है कि विभाग के प्रमुख ने उनकी ओर से माफी मांग ली है। ऐसी भी खबरें हैं कि छात्र को अप्रत्यक्ष दबाव का सामना करना पड़ा।

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) सहित छात्र समूहों ने इस घटना को "धार्मिक घृणास्पद भाषण" का उदाहरण बताते हुए शिकायत दर्ज कराई है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर को निलंबित कर दिया और कहा कि मामले की आंतरिक जांच चल रही है।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी