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बंगाल एसआईआर प्रक्रिया : तृणमूल कार्यकर्ताओं पर एसडीओ कार्यालय में फॉर्म फाड़ने का आरोप

 

कोलकाता, 19 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में उप-विभागीय अधिकारी (मुख्यालय) के कार्यालय में सोमवार को तृणमूल कार्यकर्ताओं पर फॉर्म-7 फाड़ने का आरोप है।

उप-विभागीय अधिकारी (मुख्यालय) के कार्यालय में सोमवार को उस समय तनाव फैल गया जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं का एक समूह मसौदा मतदाता सूची पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान परिसर में पहुंच गया।

इसका नेतृत्व पार्टी के विधायक असित मजूमदार कर रहे थे।

जानकारी के मुताबिक, सत्ताधारी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने विधायक के सामने ही फॉर्म-7 के कुछ आवेदन (मृत्यु और अन्य कारणों से मतदाताओं के नाम हटाने के लिए) नष्ट कर दिए।

हालांकि मजूमदार ने अपने समर्थकों द्वारा फॉर्म-7 आवेदनों को नष्ट किए जाने का प्रत्यक्षदर्शी होने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं द्वारा दूसरों की ओर से अलोकतांत्रिक तरीके से ऐसे फॉर्म-7 आवेदन जमा करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

इस घटना के बाद एसडीओ (मुख्यालय) कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई और तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें भी हुई।

इस अवसर पर उपस्थित कुछ मतदाताओं ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद पुलिसकर्मी मूक दर्शक की तरह व्यवहार कर रहे थे और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए उनकी ओर से कोई भी कार्रवाई स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दी।

मजूमदार ने दावा किया, "हम वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से जबरन हटाने के प्रयासों को कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? ये लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। रविवार को केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि अकेले हुगली लोकसभा से 1.26 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। उन्हें यह जानकारी कैसे मिली? क्या चुनाव अधिकारी उनके एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं?"

भाजपा के हुगली जिला नेतृत्व ने आरोप लगाया कि टीएमसी शुरू से ही फॉर्म-7 आवेदन जमा करने का विरोध कर रही थी, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी मृत, डुप्लिकेट या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना चाहती थी ताकि मतदान के दिनों में ऐसे नामों के खिलाफ फर्जी मतदान किया जा सके।

वहीं, जिला भाजपा नेता सुरेश साहा ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस द्वारा आज किया गया हंगामा पूर्व नियोजित था और जिला प्रशासन के एक वर्ग के साथ साजिश के तहत किया गया था।"

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम