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बंगाल सरकार ने यूसीसी के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की घोषणा की

 

कोलकाता, 29 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रस्तावित कानून के लिए एक खाका तैयार करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक नई समिति का गठन किया है।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को सदन के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए घोषणा की कि सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली समिति अगले चार सप्ताह के भीतर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद राज्य में यूसीसी को लागू करने वाला विधेयक पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किया जाएगा।

समिति के अन्य सदस्यों में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, एक कानूनी विशेषज्ञ, एक शिक्षाविद, एक सामाजिक कार्यकर्ता और पश्चिम बंगाल सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के एक अतिरिक्त सचिव शामिल होंगे। अतिरिक्त सचिव प्रशासनिक कार्यों के लिए समिति के सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

प्रारंभ में यह निर्णय लिया गया था कि पश्चिम बंगाल में यूसीसी के कार्यान्वयन से संबंधित विधेयक सोमवार को सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बाद में निर्णय लिया कि न्यायमूर्ति देसाई (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में प्रस्तावित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद ही विधेयक पेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार, समिति की सिफारिशों के आधार पर यूसीसी विधेयक इस वर्ष अगस्त में सदन में पेश किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के आदिवासी, स्वदेशी लोग, कुर्मी और अन्य मान्यता प्राप्त प्राचीन आदिवासी समुदायों को प्रस्तावित कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अपवाद उत्तराखंड और गुजरात द्वारा अपनाए गए मॉडल के आधार पर किया जा रहा है।

एक बार लागू होने के बाद पश्चिम बंगाल उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद चौथा भारतीय राज्य होगा, जहां यूसीसी लागू होगा।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "यूएनसीसी विधेयक का मसौदा 2 जुलाई को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस विधेयक को तैयार करने के लिए गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026, असम यूसीसी अधिनियम और उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड अधिनियम, 2024 को आधार बनाया गया है। राज्य सरकार ने धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय पूरे राज्य में एक ही कानून लागू करने के उद्देश्य से यह पहल की है। भारतीय जनता पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने का वादा किया गया था और सरकार उस वादे को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। हम प्रतिबद्ध हैं और हमने घोषणापत्र में जो वादा किया है, उसे लागू करेंगे।"

--आईएएनएस

डीकेपी/