हिंदू महिला अधिकार कार्यकर्ता के खिलाफ चलाया जा रहा ‘उत्पीड़न अभियान’ चिंता का विषय: मानवाधिकार संगठन
डबलिन, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन ने बांग्लादेशी हिंदू महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता शम्पा गोस्वामी पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यह उत्पीड़न उनके लिंग और अल्पसंख्यक पहचान से जुड़ा है, और यह सब बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव के माहौल में हो रहा है।
आयरलैंड स्थित मानवाधिकार समूह 'फ्रंट लाइन डिफेंडर्स' (एफएलडी) ने बांग्लादेशी अधिकारियों द्वारा गोस्वामी पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध और बांग्लादेश के गृह मंत्रालय द्वारा उनके खिलाफ पुलिस जांच के आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त की।
मानवाधिकार संगठन ने कहा कि ये कदम महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता, उनके परिवार और 'प्रेरणा' के खिलाफ "बदनाम करने, परेशान करने और प्रशासनिक बाधाएं खड़ी करने के लगातार चल रहे अभियान" का हिस्सा हैं। 'प्रेरणा' महिलाओं के नेतृत्व वाला एक संगठन है जिसकी प्रमुख गोस्वामी हैं और ये संगठन बांग्लादेश के सतखीरा जिले में काम करता है।
एफएलडी के अनुसार, यात्रा प्रतिबंध लगने के बाद, इस साल 21 अगस्त को गोस्वामी को हवाई अड्डे पर रोक दिया गया और उन्हें इंडोनेशिया के बाली जाने से रोक दिया गया, जहां उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेना था। 20 सितंबर को, उन्होंने यात्रा प्रतिबंध को चुनौती देते हुए बांग्लादेश उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की और अब सुनवाई की तारीख का इंतजार कर रही हैं।
मानवाधिकार संगठन ने आगे कहा कि गोस्वामी को 28 सितंबर को एक पत्र मिला, जिसमें उन्हें सूचित किया गया कि गृह मंत्रालय ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और फंड के दुरुपयोग के आरोपों की जांच करने का आदेश दिया है।
उत्पीड़न की निंदा करते हुए, एफएलडी ने कहा कि "शम्पा गोस्वामी पर हमलों का स्वरूप लिंग-आधारित है; ये हमले एक महिला और अल्पसंख्यक समुदाय की सदस्य के रूप में उनकी पहचान से जुड़े हैं और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के व्यापक संदर्भ में हो रहे हैं, जहां हिंदू समुदाय, अहमदिया मुसलमानों और आदिवासी समूहों के सदस्यों को लगातार भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।"
मानवाधिकार संस्था ने बांग्लादेश सरकार से मांग की कि वे गोस्वामी पर लगी यात्रा पाबंदी को तुरंत हटाएं और उनके, उनके परिवार और 'प्रेरणा' के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़न और डराने-धमकाने की कार्रवाई बंद करें।
एफएलडी ने अधिकारियों से यह भी आग्रह किया कि वे गोस्वामी, उनकी बेटियों और 'प्रेरणा' के कर्मचारियों को निशाने पर ले दी जा रही धमकियों, जबरन वसूली की कोशिशों और ऑनलाइन उत्पीड़न की तुरंत, गहन और निष्पक्ष जांच करें तथा इसके लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सजा दिलाएं।
--आईएएनएस
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