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बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच बांग्लादेश में फैली अराजकता: रिपोर्ट

 

ढाका, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में भीड़ के हमलों और तोड़फोड़ की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसमें दिन हो या रात, कोई भी व्यक्ति निशाना बन सकता है, और हिंसा के बाद उसे सही ठहराने के लिए तरह-तरह की बातें या तर्क सामने आते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, चाहे सैकड़ों दरगाहों और खानकाहों (सूफी केंद्रों) को तोड़ना हो या हाल ही में किसी मशहूर कंटेंट क्रिएटर के स्टूडियो में तोड़फोड़, ऐसे कामों को सही ठहराने वालों की कोई कमी नहीं है। यह अराजकता और सामाजिक पतन के चिंताजनक फैलाव को दिखाता है।

बांग्लादेश के अखबार 'प्रोथोम आलो' की एक रिपोर्ट में कहा गया है, "समृद्ध बांग्लादेश देखने और बनाने का सपना पुराना है। यह सिर्फ भाषणों या साहित्य तक सीमित नहीं है। हजारों लोगों ने अलग-अलग समय पर इस सपने के लिए अपनी जान दी है। कई लोगों ने अपने करियर को बनाने के बजाय इस सपने को पूरा करने पर ध्यान दिया। उनके लिए अपने करीबी लोगों की इच्छाओं से ज्यादा देश का भला जरूरी था। ऐसा कई दूसरे देशों में भी हुआ है। बांग्लादेश के मामले में वह सपना बार-बार अधूरा ही रह गया है।"

बांग्लादेश के अखबार 'न्यू एज' का हवाला देते हुए कहा गया कि रिवर पुलिस ने पिछले 20 महीनों में नदियों से 900 से ज्यादा शव बरामद किए हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा शव ढाका इलाके की जलधाराओं में मिले।

इसके अलावा, बांग्लादेश के बंगाली भाषा के अखबार 'भोरर कागोज' ने बताया कि इस साल के पहले आठ महीनों में राजधानी के पुलिस स्टेशनों में जबरन वसूली के 723 मामले या शिकायतें दर्ज की गईं। जिन शिकायतों की जांच की गई, उनमें से 85 प्रतिशत सही पाई गईं। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों मामलों में जानकारी पुलिस से ली गई थी।

इसमें सवाल उठाया गया, "बांग्लादेश के समाज में होने वाले असली अपराधों का एक छोटा सा हिस्सा ही पुलिस की जानकारी में आता है। अक्सर, और परेशानी से बचने के लिए पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराते। ऐसे में, ये रिपोर्टें एक डरावने आइसबर्ग (बर्फ के पहाड़) के ऊपरी हिस्से जैसी लग सकती हैं। इससे यह सवाल भी उठता है: अगर राजधानी और उसके आसपास के इलाकों का यह हाल है, तो दूर-दराज के गांवों में क्या हो रहा होगा?"

रिपोर्ट के मुताबिक, असलियत यह है कि 2024 के बाद कोई भी राजनीतिक व्यवस्था तब तक नहीं टिक सकती जब तक वह लोगों की न्याय की चाहत को पूरा न करे, संसाधनों का समान बंटवारा सुनिश्चित न करे और जनहित में कानूनों और प्रशासन में सुधार न करे। फिर भी, रिपोर्ट में कहा गया है कि ठीक इसी वजह से, मौजूदा राजनीति ऐसे सुधार करने को तैयार नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया, "जबरन गायब करने की घटनाओं को रोकने वाले कानून, मानवाधिकार आयोग कानून, आरएबी में फेरबदल, संसदीय स्थायी समितियों के गठन और कामकाज के तरीके, और साइबर कानून के ड्राफ्ट में अस्पष्ट और खतरनाक प्रावधानों से बहुत कुछ साफ हो गया है।"

इस हफ्ते की शुरुआत में बांग्लादेश की अवामी लीग ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी बीएनपी सरकार के दौर में देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। उन्होंने हत्या, रेप, भीड़ द्वारा हत्या और लोगों को जबरन गायब करने की चिंताजनक घटनाओं का हवाला दिया।

पार्टी ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद पर कानून-व्यवस्था के बजाय राजनीतिक बदले की भावना को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिगड़ते हालात के बावजूद, वे एक मंच पर आए और अवामी लीग को खत्म करने की डींगें हांकते हुए ऐसा करने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी की।

पार्टी ने कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। जब कोई मंत्री उस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहने के बाद राजनीतिक गिरफ्तारियों के लिए इनाम की घोषणा करने लगता है, तो यह साफ हो जाता है कि इस सरकार के लिए लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है, बल्कि राजनीतिक बदला लेना प्राथमिकता है।"

--आईएएनएस

डीकेपी/