बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा जारी, छह महीने में 257 सांप्रदायिक घटनाएं दर्ज: रिपोर्ट
ढाका, 28 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि इस वर्ष के पहले छह महीनों में देशभर में सांप्रदायिक हिंसा की 257 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 44 लोगों की मौत हुई।
'बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद' की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच दर्ज घटनाओं में हत्या, हमले, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, अपहरण, जबरन कब्जे और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, "कुल 257 घटनाओं में से 40 मामलों में 44 लोगों की जान गई। इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ हिंसा के पांच मामले सामने आए, जिनमें दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के मामले भी शामिल हैं।" संगठन ने अपहरण, जबरन वसूली और यातना के 10 मामलों का भी उल्लेख किया है।
मानवाधिकार संगठन के अनुसार, अल्पसंख्यकों पर हमले, धमकियों और शारीरिक उत्पीड़न के 42 मामले दर्ज किए गए। वहीं धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर की गई हिंसा के 62 मामले सामने आए, जिनमें मूर्तियों को नुकसान पहुंचाना, लूटपाट और आगजनी शामिल हैं। धार्मिक संस्थानों की जमीन पर कब्जे या कब्जे के प्रयास के 15 मामले तथा घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमले, तोड़फोड़, लूट और आगजनी के 47 मामले दर्ज किए गए।
संगठन ने ईशनिंदा के आरोपों में गिरफ्तारी और उत्पीड़न के नौ मामलों, घरों, जमीन और व्यावसायिक संपत्तियों पर जबरन कब्जे के 21 मामलों तथा अन्य प्रकार की सांप्रदायिक हिंसा की छह घटनाओं का भी जिक्र किया।
ये आंकड़े सोमवार को ढाका स्थित नेशनल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिषद के कार्यवाहक महासचिव मोनिंद्र कुमार नाथ ने प्रस्तुत किए। परिषद ने कहा कि वर्ष 2025 और 2026 के पहले छह महीनों के दौरान हिंसा का पैटर्न लगभग समान बना रहा, लेकिन 2026 में हत्याओं, धार्मिक स्थलों पर हमलों, आगजनी, लूटपाट और जमीन कब्जाने के प्रयासों में वृद्धि देखी गई।
परिषद ने बताया कि अगस्त 2024 से जून 2026 के बीच अल्पसंख्यक समुदायों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को प्रभावित करने वाली 2,055 घटनाएं दर्ज की गईं। संगठन के अनुसार, इसके कारण कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई और वे लंबे समय तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि इन घटनाओं से अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है, आंतरिक विस्थापन बढ़ा है और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास कमजोर हुआ है।
परिषद ने भगवान राम की 81 फुट ऊंची प्रतिमा बनाने का प्रस्ताव रखने वाले हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी पर भी चिंता जताई और इसे धार्मिक स्वतंत्रता तथा कानून के शासन के खिलाफ बताया। संगठन ने नवंबर 2024 से जेल में बंद हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग भी दोहराई।
परिषद ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों और आदिवासी समुदायों को अत्यंत संवेदनशील समूह के रूप में मान्यता देने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" नीति अपनाने की मांग की है।
--आईएएनएस
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