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नीति निर्माण में 'पहली कक्षा' से आगे नहीं बढ़ पाया बांग्लादेश: रिपोर्ट

 

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश ने पिछले 55 वर्षों में सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन नीति निर्माण के लिए संस्थागत क्षमता की कमी से वह अब भी जूझ रहा है। बांग्लादेश के समाचार पत्र 'द डेली स्टार' की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश पांच दशकों से अधिक समय बीतने के बाद भी नीति निर्माण में 'पहली कक्षा' से आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रहा है। नीति निर्धारकों का बार-बार तबादला, उनका कम कार्यकाल और संबंधित क्षेत्र में विशेषज्ञता की अनदेखी कर अधिकारियों की नियुक्ति इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।

ढाका विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर डॉ. सैयद अब्दुल हमीद ने कहा कि सार्वजनिक प्रशासन में इस तरह की कार्यप्रणाली दीर्घकालिक सुधारों की योजना बनाने और उन्हें लगातार लागू करने की क्षमता को कमजोर करती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में नीति निर्माण की समस्या प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि संस्थागत अनुभव को सुरक्षित रखने और विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने में विफलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, किसी क्षेत्र में पूर्व अनुभव नहीं रखने वाले अधिकारियों को अपने सीमित कार्यकाल का बड़ा हिस्सा बुनियादी जानकारी हासिल करने में लगाना पड़ता है, जबकि सुधारों को लागू करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। जब तक अनुभवी अधिकारी संबंधित क्षेत्र की बेहतर समझ विकसित कर पाते हैं, तब तक उनका तबादला हो जाता है या वे सेवानिवृत्त हो जाते हैं। इससे महत्वपूर्ण सुधारों को जमीन पर उतारने में बाधा आती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "शासन का एक महत्वपूर्ण पहलू अब भी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाया है। यह मजबूत संस्थानों और निरंतर नेतृत्व के माध्यम से सार्वजनिक नीतियों को तैयार करने, लागू करने, उनका मूल्यांकन करने और उनमें सुधार करने की हमारी क्षमता है।"

नीति निर्माण से जुड़ी समस्याओं का डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतृत्व में बदलाव के साथ यदि कोई नया डिजिटल प्लेटफॉर्म या कार्यप्रणाली शुरू की जाती है, तो पहले से मौजूद प्रणालियों के समानांतर नई व्यवस्था बनाने और बार-बार निवेश करने से सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर नीति निर्माण एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें लगातार सीखने और सुधार करने की आवश्यकता होती है। इसके तहत समस्याओं की पहचान करना, साक्ष्य जुटाना और उनका विश्लेषण करना, संबंधित पक्षों से परामर्श करना, विभिन्न विकल्पों का आकलन करना तथा वित्तीय और प्रशासनिक व्यवहार्यता की जांच करना जरूरी है।

डॉ. हमीद ने प्रमुख पदों पर नियुक्तियों में संबंधित क्षेत्र की विशेषज्ञता को अधिक महत्व देने, अनावश्यक तबादलों को कम करने और अधिकारियों के लिए उचित न्यूनतम कार्यकाल सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। उन्होंने नीतियों के पीछे के तर्क और उनके क्रियान्वयन से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने पर भी जोर दिया।

रिपोर्ट में मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी बताई गई है। इसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, पेशेवर संगठनों और स्वतंत्र विशेषज्ञों को नीति निर्माण तथा उनके मूल्यांकन में अधिक प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इस सहयोग को मजबूत बनाने के लिए विश्वसनीय डेटा प्रणाली और साक्ष्यों को साझा करने की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है।

--आईएएनएस

डीएससी