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बांग्लादेश में पत्रकारों पर हमलों की एडिटर्स काउंसिल ने की कड़ी निंदा, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की उठाई मांग

 

ढाका, 26 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश की एडिटर्स काउंसिल ने ढाका के धनमंडी इलाके में पत्रकारों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ने घटना की तेज, बिना किसी भेदभाव के और पारदर्शी जांच की मांग की है।

कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के ऊपर 23 जून को धनमंडी 32 इलाके में कथित तौर पर कई पत्रकारों पर हमला करने का आरोप लगाया गया है। हमलावरों ने पत्रकारों पर अवामी लीग का सहयोगी होने का आरोप लगाया गया था।

इस हमले में जमुना टेलीविजन के सीनियर रिपोर्टर रब्बी सिद्दीकी और डेली सकाल मल्टीमीडिया के रिपोर्टर महफूज़ुर रहमान शिशिर घायल हो गए।

बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को जारी एक बयान में काउंसिल ने कहा कि जमात की ढाका साउथ यूनिट के एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद जानकारी इकट्ठा करते समय पत्रकारों पर हमला किया गया।

संगठन ने जमात के इस दावे पर सवाल उठाया कि यह घटना “गलतफहमी” की वजह से हुई। उन्होंने कहा, “जब पत्रकार अपनी प्रोफेशनल ड्यूटी कर रहे हों, तो उन पर हमला करने को कोई सही नहीं ठहराया जा सकता।”

काउंसिल ने कहा कि ऐसे हमले प्रेस की आजादी के लिए खतरा हैं, पत्रकारों के खबरें इकट्ठा करने के अधिकार में रुकावट डालते हैं और बोलने की आजादी को खत्म करते हैं।

संगठन ने अधिकारियों से भरोसेमंद जांच के जरिए हमले के पीछे के लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ सही कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की।

एडिटर्स काउंसिल ने भविष्य में पत्रकारों को बिना किसी डर के अपनी व्यवसायिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए एक सुरक्षित माहौल देने की अपील की।

गवाहों के हवाले से, बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट ‘व्यूज बांग्लादेश’ ने बताया कि जमात के कार्यकर्ताओं ने पत्रकार महफूजुर रहमान शिशिर पर हमला किया, उनका कॉलर पकड़ा और जमीन पर गिरने के बाद उन्हें घूंसे और लात मारे।

साथी पत्रकारों से बात करते हुए, शिशिर ने कहा, "जमात के कार्यकर्ताओं ने मुझे पीटा और घायल कर दिया। यह शर्मनाक है। आप प्रेस की आजादी की बात करते हैं। क्या किसी पत्रकार का कॉलर पकड़कर पीटना उस आजादी का उदाहरण है?"

बता दें, पिछली मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के शासन के समय से बांग्लादेश में पत्रकारों पर हमले की घटना में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। हैरानी की बात यह है कि पत्रकारों पर हमले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार के समय भी जारी है।

इस महीने की शुरुआत में, एक इंटरनेशनल प्रेस फ्रीडम ग्रुप, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से देश में मीडिया की आजादी की रक्षा करने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने की अपील की और उनकी सरकार के पहले 100 दिनों के बाद "पत्रकारों पर पक्षपातपूर्ण अत्याचार" को खत्म करने की मांग की।

सीपीजे एशिया-पैसिफिक प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर कुणाल मजूमदार ने कहा, "बांग्लादेश में प्रेस की आजादी को अक्सर हर नई सरकार के लिए एक मौके की तरह इस्तेमाल किया गया है ताकि वह उन पत्रकारों के खिलाफ कानून बना सके जो कथित तौर पर पिछली सरकार से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने अलग होने का वादा किया था, लेकिन 100 दिन बाद भी, कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।"

उन्होंने आगे कहा, “सरकार जेल में बंद पत्रकारों को रिहा करके और राजनीति से जुड़े केस वापस लेकर, प्रेस के खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई खत्म करके, पत्रकारों को भीड़ की हिंसा से बचाकर, बदनाम करने वाले कैंपेन रोककर, और ऐसे कानूनों को ठीक करके शुरुआत कर सकती है जिनसे यह सब मुमकिन हो। इन कदमों से यह सुनिश्चित होगा कि हर पत्रकार पर एक जैसा स्टैंडर्ड लागू हो, चाहे उन्हें किसी का भी समर्थन करने वाला माना जाए।”

बांग्लादेश में मीडिया प्रोफेशनल्स के खिलाफ क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम का इस्तेमाल बंद करने की मांग करते हुए, सीपीजे ने कहा कि अगस्त 2024 से दर्जनों पत्रकारों को हिरासत में लिया गया है या उन पर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी कवरेज को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का समर्थक माना गया था।

--आईएएनएस

केके/पीएम