बांग्लादेश: पिछले तीन महीनों में 162 पत्रकारों पर हमले हुए, उन्हें धमकाया और परेशान किया गया
ढाका, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। ढाका की एक रिसर्च संस्था की मॉनिटरिंग रिपोर्ट का हवाला देते हुए, स्थानीय मीडिया ने बताया कि बांग्लादेश में पिछले तीन महीनों में कम से कम 162 पत्रकारों को अपनी पेशेवर ड्यूटी निभाते समय 112 अलग-अलग घटनाओं में हमलों, धमकियों और कानूनी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
मीडिया इनिशिएटिव फॉर डेवलपमेंट की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में पत्रकारों के लिए तीन महीने की अवधि में अगस्त का महीना सबसे बुरा साबित हुआ, जिसमें हिंसा और उत्पीड़न की सर्वाधिक घटनाएं दर्ज की गई।
जुलाई में, देश भर में 39 घटनाओं से 50 पत्रकार प्रभावित हुए। अगस्त में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा, जब 44 घटनाओं में 67 पत्रकार प्रभावित हुए, जो पिछले महीने की तुलना में 12.8 प्रतिशत ज्यादा था।
इसके अलावा, बांग्लादेशी दैनिक 'ढाका ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में देश भर में 29 घटनाओं में 45 पत्रकारों को उत्पीड़न और हिंसा का सामना करना पड़ा।
मीडिया इनिशिएटिव फॉर डेवलपमेंट की रिपोर्ट से पता चला कि इस अवधि के दौरान पत्रकारों को डराने-धमकाने के मुख्य तरीकों में जान से मारने की धमकियां शामिल थीं।
जुलाई में, रिपोर्ट की गई घटनाओं में जान से मारने की धमकियों का हिस्सा 48.7 प्रतिशत था, इसके बाद शारीरिक हमले 28.2 प्रतिशत थे।
इस तीन महीने की अवधि में पत्रकारों को गंभीर खतरों का सामना करना पड़ा, जिनमें गोलीबारी, उनके घरों और कार्यालयों पर हमले, मामले दर्ज करना और अपहरण जैसी घटनाएं शामिल थी। अगस्त में भी पत्रकारों पर शारीरिक हमले जारी रहे।
प्रिंट मीडिया में काम करने वाले पत्रकार, खासकर वे जो फील्ड में और बड़े शहरों के बाहर काम करते थे, सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। इस अवधि के दौरान निशाना बनाए गए 162 पत्रकारों में से 89 दैनिक समाचार पत्रों से, 53 टेलीविजन चैनलों से और 20 ऑनलाइन समाचार आउटलेट्स से थे।
ये घटनाएं बांग्लादेश के 30 से ज्यादा जिलों में दर्ज की गईं, जिनमें ढाका, चटगांव, सिराजगंज, बारीसाल और सिलहट डिवीजनों में पत्रकारों के खिलाफ हमले और उत्पीड़न की घटनाएं अपेक्षाकृत ज्यादा देखी गईं।
रिपोर्ट ने पत्रकारों पर हमलों और धमकियों के बाद ठोस कानूनी कार्रवाई न होने पर भी चिंता जताई।
ढाका ट्रिब्यून ने एमआईडी के कार्यकारी निदेशक राशदुल हसन के हवाले से कहा कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा प्रेस की आजादी और लोगों के सूचना के अधिकार पर सीधा हमला है। सरकार को हर घटना की निष्पक्ष और त्वरित जांच करके और जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दिलाकर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
--आईएएनएस
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