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पिछले एक साल में अफगानिस्तान में हुई प्रेस की स्वतंत्रता के उल्लंघन की कम से कम 150 घटनाएं : रिपोर्ट

 

काबुल, 3 मई (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में पिछले एक साल के दौरान प्रेस की आजादी और पत्रकारों के अधिकारों के कम से कम 150 उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। यह जानकारी अफगानिस्तान जर्नलिस्ट्स सेंटर (एएफजेसी) ने दी है। स्थानीय मीडिया ने रविवार को यह खबर दी।

एएफजेसी के मुताबिक, मई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच दर्ज किए गए ये मामले बताते हैं कि अफगानिस्तान में पत्रकारिता की स्थिति लगातार खराब हो रही है और मीडिया संकट गहरा रहा है। अफगानिस्तान स्थित 'अमू टीवी' ने यह रिपोर्ट दी है।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में पत्रकारों पर सेंसरशिप, पाबंदियां और दबाव काफी बढ़ गए हैं। इन 150 मामलों में से 127 मामलों में पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को धमकियां दी गईं, जबकि 20 मामलों में उन्हें हिरासत में लिया गया। इनमें से 4 पत्रकार अभी भी जेल में हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि के दौरान पाकिस्तानी हवाई हमलों में अफगानिस्तान के सरकारी रेडियो और टेलीविजन के दो कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुल मामलों की संख्या पिछले साल से कम है, लेकिन हालात ज्यादा गंभीर हो गए हैं। इसकी वजह 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद लागू की गई नीतियां हैं।

रिपोर्ट में मीडिया के कामकाज पर लगाई गई कई पाबंदियों को उजागर किया गया है। इसमें कहा गया है कि जीवित प्राणियों की तस्वीरें प्रसारित करने पर लगी रोक को आठ और प्रांतों तक बढ़ा दिया गया है। अब अफगानिस्तान के 34 में से 25 प्रांतों में यह रोक लागू है, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम आठ स्थानीय टेलीविजन स्टेशन बंद हो गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के आदेशों का पालन न करने पर कम से कम 11 मीडिया संस्थानों को अस्थायी या स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। वहीं, 10 मीडिया सहायता संगठनों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए गए। अफगानिस्तान में सूचना तक पहुंच भी काफी सीमित हो गई है। करीब आधे सरकारी मंत्रालयों और संस्थानों ने वीडियो रिपोर्टिंग या कैमरे पर इंटरव्यू देने पर रोक लगा दी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मीडिया संस्थानों पर कंटेंट को लेकर भी दबाव बढ़ रहा है। उन्हें ऐसे लोगों का इंटरव्यू न करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिन्हें तालिबान की मंजूरी नहीं है। कुछ मामलों में महिलाओं का नाम लेने या लाइव प्रसारण के दौरान लड़कियों से बात करने पर भी मीडिया गतिविधियां रोक दी गईं।

'अमू टीवी' की रिपोर्ट के अनुसार, महिला पत्रकारों पर भी पाबंदियां बढ़ गई हैं। इनमें महिलाओं की आवाज प्रसारित करने पर रोक और आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला रिपोर्टरों की आवाज को सेंसर करने जैसी घटनाएं शामिल हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ पत्रकारों को उनके पहनावे या दाढ़ी की लंबाई जैसी निजी बातों को लेकर गिरफ्तार किया गया। तालिबान ने पुराने मीडिया कानूनों की जगह नए लिखित और मौखिक निर्देश लागू कर दिए हैं, जिनके तहत कड़ी पाबंदियां लगाई जा रही हैं।

इस रिपोर्ट में, एएफजेसी ने रिपोर्ट में स्वतंत्र मीडिया की खराब होती आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई है। खासकर प्रांतों में फंडिंग कम होने और बढ़ती पाबंदियों के कारण कई मीडिया संस्थान बंद होने की कगार पर हैं और पत्रकारों को पेशा छोड़ना पड़ रहा है या देश छोड़ना पड़ रहा है।

इस समूह ने तालिबान से आग्रह किया है कि वे अपनी नीतियों की समीक्षा करें, गिरफ्तार किए गए सभी पत्रकारों को रिहा करें, और मीडियाकर्मियों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करें। साथ ही, इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे अफगानिस्तान में पत्रकारों के लिए राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहायता बढ़ाएं।

--आईएएनएस

एएस/