विपक्ष को चुनाव आयोग के समक्ष चिंताएं उठाने की अनुमति दी जानी चाहिए: कांग्रेस
जयपुर, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को संसद से निर्वाचन सदन तक इंडिया ब्लॉक के मार्च के दौरान विपक्षी नेताओं की हिरासत पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष अपने विचार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।
गहलोत ने कहा कि इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने और चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं रखने के लिए मार्च का आयोजन किया था।
उनके अनुसार, विपक्षी नेताओं के निर्वाचन सदन पहुंचने से पहले ही मार्च रोक दिया गया और विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई सांसदों को हिरासत में ले लिया गया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष सीधे चुनाव आयोग को अपनी चिंताएं बताने का अवसर तलाश रहा था और उन्होंने सवाल उठाया कि नेताओं को चुनाव आयोग से मिलने से क्यों रोका गया।
गहलोत ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं रखना चाहता था। आयोग से मिलने से पहले ही मार्च रोकना और नेताओं को हिरासत में लेना प्रश्नचिह्न लगाता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग की ओर बढ़ने से रोका और राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के साथ बातचीत करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
गहलोत ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुनना चाहिए। उनके अनुसार, चुनाव आयोग को हितधारकों द्वारा प्रस्तुत प्रश्नों और अभ्यावेदनों का जवाब देना चाहिए।
गहलोत ने कहा कि वोट चोरी के आरोपों और एसआईआर से संबंधित उठाए जा रहे सवालों का समाधान पारदर्शिता, जवाब और उचित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान संवाद और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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