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असम राइफल्स ने त्रिपुरा में भारी मात्रा में गांजा जब्त किया

 

अगरतला, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम राइफल्स ने त्रिपुरा के खोवाई जिले में लगभग 1.74 करोड़ रुपए मूल्य का 340 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी पर नकेल कसौटी कसते हुए असम राइफल्स ने सीमा शुल्क अधिकारियों के समन्वय से मंगलवार शाम को खोवाई जिले में एक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप सूखा गांजा जब्त किया गया।

उन्होंने बताया कि यह अभियान खुफिया जानकारी और निरंतर निगरानी के आधार पर चलाया गया था।

अभियान के दौरान, संयुक्त दल ने एक कार को रोका और उसकी तलाशी लेने पर सूखा गांजा बरामद किया।

हालांकि, वाहन का चालक मौके से भागने में सफल रहा। इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अवैध नशीले पदार्थों की बरामदगी पूर्वोत्तर में संचालित नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को बाधित करने के लिए असम राइफल्स और अन्य सहयोगी एजेंसियों के निरंतर प्रयासों को उजागर करती है।

बरामद प्रतिबंधित सामग्री और जब्त वाहन को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिया गया है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य पुलिस, असम राइफल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर), और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त अभियानों में राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले में अवैध गांजे की खेती को अक्सर नष्ट कर देते हैं।

अधिकारी के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल नहीं होता और बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में तस्करी करके भेजा जाता है, जहां इसकी ऊंची कीमत मिलती है। सूखे गांजे की खेप अक्सर ट्रकों, छोटे वाहनों और यहां तक ​​कि यात्री ट्रेनों से भी परिवहन के दौरान जब्त की जाती हैं।

महिलाओं सहित निवासियों ने दावा किया है कि वे अपनी आजीविका के लिए पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में गांजे की खेती करते हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई बार यह पाया गया है कि वन भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही है।

मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा मादक एवं मनोरोगी पदार्थों की खेती, कब्जा, बिक्री, खरीद या सेवन करना अवैध है, और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और 20 वर्ष तक की कारावास की सजा हो सकती है।

--आईएएनएस

एमएस/