असम राइफल्स और कस्टम विभाग ने त्रिपुरा में 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया
अगरतला, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के समन्वय से त्रिपुरा के खोवाई जिले में लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के सहयोग से गुरुवार शाम को त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया।
यह अभियान खुफिया जानकारी और निरंतर निगरानी के आधार पर चलाया गया था।
संयुक्त टीम ने पश्चिम सोनातला से संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया। पीछा पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिले की सीमा पर स्थित हेजामारा ब्लॉक से 18 किलोमीटर पहले बैखुंतपुर गांव में समाप्त हुआ।
हालांकि, अभियान के दौरान वाहन का चालक मौके से भागने में सफल रहा।
इस जब्ती के संबंध में किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं मिली है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अवैध नशीले पदार्थों की बरामदगी पूर्वोत्तर में सक्रिय नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को बाधित करने के लिए असम राइफल्स और सहयोगी एजेंसियों के निरंतर प्रयासों को उजागर करती है।
बरामद प्रतिबंधित सामग्री को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
इस बीच, असम राइफल्स ने सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ मिलकर 6 अक्टूबर को खोवाई जिले में लगभग 1.74 करोड़ रुपए मूल्य का 340 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राज्य पुलिस, असम राइफल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त अभियानों में राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले में अवैध गांजे की खेती को अक्सर नष्ट कर देते हैं।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल नहीं होता और बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में तस्करी करके भेजा जाता है, जहां इसकी ऊंची कीमत मिलती है।
परिवहन के दौरान, सूखे गांजे की खेप अक्सर ट्रकों, छोटे वाहनों और यहां तक कि यात्री ट्रेनों से भी जब्त की जाती है।
महिलाओं सहित निवासियों ने दावा किया है कि वे अपनी आजीविका के लिए पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में गांजे की खेती करते हैं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई बार यह पाया गया है कि वन भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मादक औषधि और मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा मादक और मनोरोगी पदार्थों की खेती, कब्जा, बिक्री, खरीद या सेवन करना अवैध है, और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और 20 साल तक की कैद हो सकती है।
--आईएएनएस
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