असीम मुनीर की बढ़ती ताकत भी नहीं छिपा पा रही पाकिस्तान की घरेलू कमजोरियां: रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 5 सितंबर (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को विदेशों में मिलने वाली स्वीकार्यता और समर्थन देश की घरेलू कमजोरियों को लंबे समय तक नहीं छिपा सकता। मुनीर जितने अधिक व्यक्तिगत रूप से शक्तिशाली होते जाएंगे, पाकिस्तान की सफलताएं और असफलताएं उतनी ही ज्यादा उनके नेतृत्व से जुड़ती जाएंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियों को अब केवल सरकार की समस्या कहकर नहीं टाला जा सकता। वहीं, आंतरिक सुरक्षा में नाकामियों के लिए भी केवल नागरिक प्रशासन को दोष देना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में सेना का प्रभाव बहुत व्यापक है।
'वन वर्ल्ड आउटलुक' की रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक दमन भी अब धीरे-धीरे उस सेना प्रमुख से जुड़ता जा रहा है, जो पूरे सिस्टम की निगरानी करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अभी भी आर्थिक रूप से सीमित और राजनीतिक रूप से बंटा हुआ देश बना हुआ है। स्थिरता की छवि पेश करने के लिए वह लगातार कठोर उपायों पर निर्भर होता जा रहा है। वहीं, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में उग्रवाद अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के साथ पाकिस्तान के रिश्ते आधिकारिक बयानों में जितने अच्छे दिखाए जाते हैं, वास्तव में उतने नहीं हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में होने के बावजूद राजनीतिक प्रभाव बनाए हुए हैं। इसके अलावा, सेना के भीतर लिए गए कुछ फैसले असंतुष्ट जनरलों की संख्या बढ़ा सकते हैं, जो असीम मुनीर के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना की ताकत पाकिस्तान की राजनीति को प्रभावित कर सकती है, लेकिन वह देश की बुनियादी समस्याओं को नहीं बदल सकती।
रिपोर्ट में कहा गया, "आर्थिक स्थिरता की चर्चाओं के बावजूद पाकिस्तान अब भी बाहरी वित्तीय सहायता, विदेशों से आने वाले धन (रेमिटेंस) और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं व मित्र देशों की मदद पर काफी हद तक निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष लगातार सुधारों की मांग कर रहा है, क्योंकि पाकिस्तान में बार-बार संकट पैदा करने वाली मूल कमजोरियां अब भी मौजूद हैं।"
रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र में सर्कुलर कर्ज अब भी बहुत बड़ा है। करदाताओं का दायरा पर्याप्त नहीं है। निर्यात में विविधता की कमी है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश देश की जरूरतों के मुकाबले कमजोर बना हुआ है। सरकारी उपक्रम लगातार संसाधनों पर बोझ बने हुए हैं। वहीं, प्रशासनिक समस्याओं के कारण सुधारों को लागू करना उनकी घोषणा करने से कहीं ज्यादा मुश्किल है। इससे एक असामान्य राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पैदा हो गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार राजनीतिक विरोधियों को जेल भेजने की पर्याप्त ताकत रखती है, लेकिन टैक्स चोरी करने वाले प्रभावशाली समूहों के खिलाफ कार्रवाई में अक्सर कमजोर पड़ जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, "पाकिस्तान टीवी चैनलों को नियंत्रित करने में जितना सक्षम दिखता है, उतना बिजली क्षेत्र के नुकसान को रोकने में नहीं। वह सुरक्षा व्यवस्था पर भारी संसाधन खर्च कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए जरूरी संस्थागत सुधार लागू करने में संघर्ष करता है।"
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह असंतुलन महत्वपूर्ण है, क्योंकि सख्त नियंत्रण वाली व्यवस्थाएं केवल दबाव के बल पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन के आधार पर भी चलती हैं। यदि लोगों को लगता है कि राजनीतिक प्रतिबंधों के साथ आर्थिक स्थिरता भी है, तो व्यवस्था चल सकती है। लेकिन जब राजनीतिक पाबंदियों के साथ महंगाई, बेरोजगारी, अधिक टैक्स, महंगी बिजली और खराब होती सार्वजनिक सेवाएं भी हों, तो व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लगातार अधिक सख्ती की जरूरत पड़ती है।
--आईएएनएस
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