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'डॉ मनमोहन सिंह हर मायने में थे 'मिस्टर क्लीन', 'सामना' में बोली शिवसेना (यूबीटी)

 

मुंबई, 31 जुलाई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट द्वारा लंबे समय से लंबित तलाबीरा-II कोल ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को मरणोपरांत पूरी तरह से 'क्लीन चिट' दिए जाने के बाद शुक्रवार को शिवसेना (यूबीटी) ने भाजपा को घेरा।

यह मामला ओडिशा में तलाबीरा-II कोल ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। 2015 में एक विशेष अदालत ने डॉ. सिंह और कई अन्य लोगों को समन जारी किया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, लेकिन अंतिम फैसला आने तक मामला लंबित रहा।

पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक संपादकीय में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने इस फैसले को डॉ. सिंह पर लगाए गए एकमात्र राजनीतिक दाग को निर्णायक रूप से हटाने वाला बताया और साथ ही प्रधानमंत्री से आधिकारिक माफी की मांग की। संपादकीय में सवाल किया गया, "क्या प्रधानमंत्री अब मानेंगे कि वे आरोप झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित थे? क्या वह देश से नहीं, तो कम से कम डॉ. सिंह की आत्मा से माफी मांगेंगे?"

संपादकीय में इस बात का जिक्र किया गया कि डॉ. सिंह हर मायने में 'मिस्टर क्लीन' थे और उन्हें अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए कभी अदालती मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ी।

ठाकरे गुट ने कहा कि राजनीतिक आरोपों की 20 साल की छाया ने राजनीतिक विरोधियों को यूपीए सरकार के दौरान और उसके बाद भी अनुचित लाभ उठाने का मौका दिया।

संपादकीय का समापन इस सवाल के साथ हुआ कि क्या देश को राजनीतिक दाग धुलने पर राहत महसूस करनी चाहिए या इस बात का दुःख मनाना चाहिए कि डॉ. सिंह को उनके जीवनकाल में यह संतुष्टि नहीं मिल सकी। साथ ही न्यायपालिका और राजनीतिक तंत्र से कानूनी प्रक्रिया में होने वाली भारी देरी पर विचार करने का आग्रह किया गया।

बता दें कि तलाबीरा-II कोल ब्लॉक मामला वर्ष 2005 में ओडिशा स्थित तलाबीरा-2 कोयला खदान को हिंडाल्को कंपनी को गलत तरीके से आवंटित करने से जुड़ा था। जुलाई 2026 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूर करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया।

--आईएएनएस

वीकेयू/डीकेपी