चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार पर संदेह नहीं करते: अमित मालवीय
नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के एक 'एक्स' पोस्ट ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। इसे कई लोग नवीनतम राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विश्वास की अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं।
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, "चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार पर संदेह नहीं करते, कभी भी मात दे सकती है।
इस पोस्ट की टाइमिंग ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। अमित मालवीय द्वारा यह पोस्ट ऐसे समय में किया गया, जब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार पर विपक्ष हमलावर है।
विपक्षी पार्टियों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सरकार के लिए एक राजनीतिक झटका बताया है। उनका दावा है कि सरकार कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लगातार विरोध के आगे झुक गई। विपक्ष का भी अफवाह फैला रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मतलब है कि सरकार जनता और राजनीतिक दबाव के कारण पीछे हटने को मजबूर हुई।
अमित मालवीय के संदेश को राजनीतिक जानकार एक बड़े राजनीतिक मतलब के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, भाजपा नेता ने अपने पोस्ट में न तो प्रधानमंत्री का नाम लिया और न ही वर्तमान में चल रहे विवाद का, लेकिन इस पोस्ट का मतलब यह निकाला गया है कि इससे प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप और स्ट्रेटेजिक काबिलियत पर अटूट भरोसा जताया गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि संदेश में इस्तेमाल की गई लाइन—चीते की चाल, बाज की तेज नजर और बाजीराव की मशहूर तलवारबाजी—फुर्ती, दूर की सोच और पक्के एक्शन की निशानी है।
एक दिन पहले अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने कठिन परिश्रम के बाद आराम करने और जश्न मनाने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए समय और स्थान भी महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने लिखा कि जब किसी आंदोलन को छात्रों के लिए न्याय की लड़ाई के रूप में प्रस्तुत किया जाता है और उसकी नैतिक नींव उन छात्रों की आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं पर आधारित बताई जाती है, तब उसके तुरंत बाद नाच-गाने और जश्न जैसे दृश्य कई लोगों को बेहद असंवेदनशील लग सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यह ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी के निधन पर शोक जताने का दावा करते हुए उसी समय जश्न मनाया जा रहा हो। भाजपा नेता ने अपने पोस्ट में जिक्र किया कि इससे पहले मंच पर विजेता दहिया के डांस का वीडियो वायरल हुआ था। अब अभिजीत दिपके के समूह से जुड़े लोगों, जिनमें सौरव, रांका और अन्य शामिल बताए जा रहे हैं, उनके जश्न मनाने के वीडियो सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने पूछा कि इन तस्वीरों और वीडियो से उन हजारों युवाओं को क्या संदेश जाएगा, जो जंतर-मंतर पर यह सोचकर पहुंचे थे कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चल रहे एक गंभीर आंदोलन का हिस्सा हैं।
अमित मालवीय ने कहा कि अब कई छात्रों को यह महसूस हो सकता है कि उन्हें गुमराह किया गया। उनके अनुसार, छात्रों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाला आंदोलन इन वीडियो के आधार पर आत्ममंथन की बजाय जश्न के साथ समाप्त होता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जो छात्र ईमानदारी से इस आंदोलन में शामिल हुए थे, उन्हें यह सवाल पूछने का अधिकार है कि कहीं उनकी भावनाओं का इस्तेमाल किसी राजनीतिक अभियान के लिए तो नहीं किया गया। अमित मालवीय ने अपने पोस्ट के अंत में कहा कि देश के युवाओं को दिखावे की नहीं, बल्कि ईमानदारी और गंभीरता की आवश्यकता है।
--आईएएनएस
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