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एआई पॉलिसी के फैसले ही भविष्य में आर्थिक विकास और ग्लोबल पावर को आकार देंगे : रोमेश वाधवानी

 

वाशिंगटन, 31 जनवरी (आईएएनएस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि आने वाले कुछ वर्षों में सरकारें जो नीतिगत फैसले लेंगी, वही यह तय करेंगे कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी बढ़ेगी, दुनिया में उसकी ताकत कितनी होगी और समाज में स्थिरता बनी रहेगी या नहीं। यह बात टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर रोमेश वाधवानी ने कही।

भारत के आने वाले एआई इम्पैक्ट समिट से पहले एक बड़ी सीएसआईएस कॉन्फ्रेंस में मुख्य भाषण देते हुए, वाधवानी ने कहा कि एआई एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जिसे ऑटोनॉमस "एआई एजेंट्स" द्वारा परिभाषित किया गया है जो सीमित मानवीय देखरेख में प्लानिंग, एग्जीक्यूट और सीखने में सक्षम हैं।

शुरुआती जेनरेटिव एआई टूल्स का जिक्र करते हुए वाधवानी ने कहा, "जो तीन साल पहले ब्रेकथ्रू टेक्नोलॉजी थी, वह अब पुरानी लगती है। दुनिया ऐसे एआई एजेंट्स की ओर बढ़ रही है जो इंसानी कर्मचारियों को मदद कर सकते हैं, उनकी जगह ले सकते हैं और आखिरकार उनसे आगे निकल सकते हैं।"

वाधवानी ने कहा कि 2025 में 5 मिलियन से भी कम एआई एजेंट्स मौजूद थे, लेकिन अगले पांच साल में इनमें हर साल 200 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। आने वाले समय में ये एआई एजेंट आपस में मिलकर काम करेंगे, कई कामों में इंसानों की जगह लेंगे और पूरे के पूरे कारोबारी कामकाज को संभाल सकेंगे।

उन्होंने साफ कहा कि यह कोई 50 साल बाद की कल्पना नहीं है, बल्कि सिर्फ पांच साल में होने वाला बदलाव है।

वाधवानी ने कहा कि एआई जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, उतनी तेजी से सरकारें नियम नहीं बना पा रही हैं। उन्होंने इसकी तुलना टेलीफोन के आविष्कार से की, जहां तकनीक आने के कई दशक बाद जाकर नीतियां बनी थीं।

उनके अनुसार, एआई से जुड़ी नीतियां पांच बड़े क्षेत्रों को प्रभावित करेंगी—भू-राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, बिजनेस कॉम्पिटिटिवनेस, इनोवेशन की गति और सोशल स्टेबिलिटी। उन्होंने कहा कि एआई नीति ही तय करेगी कि कौन जीतेगा और कौन पीछे रह जाएगा।

दुनिया के अलग-अलग देशों की तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि अमेरिका हल्के नियमों के साथ नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, यूरोप अपने एआई कानून के जरिए सख्त नियमों पर जोर दे रहा है, जबकि चीन राजनीतिक नियंत्रण के तहत एआई को अनिवार्य रूप से अपनाने की नीति अपना रहा है।

भारत के बारे में वाधवानी ने कहा कि यहां का फोकस आर्थिक विकास और बड़े पैमाने पर एआई के इस्तेमाल पर है। उन्होंने भारत को एआई के जरिए व्यावहारिक नवाचार की धरती बताया।

उनका कहना है कि भारत महंगे और जटिल मॉडलों की बजाय उपयोग पर आधारित एआई समाधानों पर ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही बड़े स्तर पर लोगों को नए कौशल सिखाए जा रहे हैं और नियम अपेक्षाकृत कम रखे गए हैं। भारत का लक्ष्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की शीर्ष तीन एआई शक्तियों में शामिल होना है।

वाधवानी ने अनुमान जताया कि एआई अगले पांच साल में भारत की जीडीपी में 1 से 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक का योगदान दे सकता है। हालांकि ऑटोमेशन से कुछ नौकरियां खत्म होंगी, लेकिन इसके बावजूद लाखों नई नौकरियां भी पैदा होंगी।

उन्होंने कहा कि भारत में होने वाला एआई इम्पैक्ट समिट यह दिखाता है कि अब वैश्विक स्तर पर एआई पर चर्चा सिर्फ विचारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसके वास्तविक इस्तेमाल पर केंद्रित हो रही है, जो खासकर ग्लोबल साउथ के लिए इम्प्लीमेंटेशन और डेवलपमेंट के नतीजों पर फोकस करती है।

--आईएएनएस

एएस/