एआई और डिजिटल टेक्नोलॉजी भारत की स्टील इंडस्ट्री को करेंगी फिर से परिभाषित: एच.डी. कुमारस्वामी
नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। भारत के स्टील उद्योग के लंबे समय तक टिके रहने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए डिजिटलाइजेशन अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक जरूरत बन गया है। यह बयान केंद्रीय स्टील और भारी उद्योग मंत्री एच.डी.कुमारस्वामी ने बुधवार को दिया।
'स्टील सेक्टर में डिजिटलाइजेशन पर चिंतन शिविर 2026' को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्टील इंडस्ट्री का भविष्य सिर्फ प्रोडक्शन क्षमता से तय नहीं होगा, बल्कि इंटेलिजेंट, कनेक्टेड और डेटा-आधारित मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की उसकी क्षमता से तय होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन पर जोर देते हुए, उन्होंने स्टील इंडस्ट्री को भारत के आर्थिक बदलाव का एक अहम स्तंभ बताया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, शहरीकरण, ट्रांसपोर्टेशन और डिफेंस प्रोडक्शन में मदद करता है।
मंत्री ने स्टील को देश के निर्माण की रीढ़ बताते हुए कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मांग कम होने के बावजूद, भारत 2018 से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टील उत्पादक के तौर पर अपनी जगह बनाए हुए है।
कुमारस्वामी ने आगे बताया कि वित्त वर्ष 2022 से कच्चे स्टील के उत्पादन में औसतन सालाना लगभग 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि तैयार स्टील की खपत सालाना लगभग 13 प्रतिशत बढ़ी है।
संबोधन में उन्होंने 2030 तक भारत की स्टील बनाने की क्षमता को 300 मिलियन टन और 2035 तक 400 मिलियन टन तक बढ़ाने के सरकार के विजन का भी उल्लेख किया।
इसके अलावा, मंत्री ने ग्लोबल स्तर पर स्टील मैन्युफैक्चरिंग को बदलने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईआईओटी), डिजिटल ट्विन्स, रोबोटिक्स और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स जैसी टेक्नोलॉजी की बड़ी क्षमता पर जोर दिया।
कुमारस्वामी ने कहा, "ये टेक्नोलॉजी बिना योजना के काम रुकने को कम करने, इंसानी गलतियों को घटाने और काम की जगह पर सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।"
स्टील मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, इंडस्ट्री के लीडर, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट, स्टार्टअप और सेल, एनएमडीसी और एमओआईएल जैसी बड़ी पब्लिक सेक्टर की स्टील कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए।
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