कैंसर के शुरुआती रिस्क पैटर्न का पता लगाने में एआई सक्षम: अध्ययन में खुलासा
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब त्वचा कैंसर के एक खतरनाक रूप मेलानोमा के शुरुआती जोखिम की पहचान करने में अहम भूमिका निभा सकता है। बुधवार को सामने आए एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है।
यह अध्ययन स्वीडन की वयस्क आबादी से जुड़े बड़े रजिस्ट्रेशन डेटा पर आधारित है।
इस स्टडी में उम्र, लिंग, बीमारियों का इतिहास, दवाओं का उपयोग और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसी जानकारी शामिल की गई।
कुल 60 लाख से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिनमें से लगभग 0.64 प्रतिशत लोगों में पांच वर्षों के भीतर मेलानोमा विकसित हुआ।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, हेल्थकेयर सिस्टम में पहले से उपलब्ध डेटा का बेहतर इस्तेमाल कर उन लोगों की पहचान की जा सकती है, जिन्हें भविष्य में इस कैंसर का ज्यादा खतरा हो सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग की साहलग्रेन्स्का एकेडमी के डॉक्टरेट स्टूडेंट मार्टिन गिलस्टेड ने कहा, "यह तरीका अभी नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसके परिणाम भविष्य की दिशा स्पष्ट करते हैं।"
अध्ययन में अलग-अलग एआई मॉडलों की तुलना की गई, जिसमें पाया गया कि उन्नत मॉडल लगभग 73 प्रतिशत मामलों में सही पहचान करने में सक्षम रहा, जबकि केवल उम्र और लिंग के आधार पर यह आंकड़ा करीब 64 प्रतिशत था।
शोध में यह भी सामने आया कि यदि बीमारी के इतिहास, दवाओं और सामाजिक कारकों को साथ मिलाया जाए, तो ऐसे छोटे समूहों की पहचान की जा सकती है जिनमें अगले पांच साल में मेलानोमा का खतरा 33 प्रतिशत तक हो सकता है।
सैम पोलेसिस, जो त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं, ने कहा, "इस तरह के हाई-रिस्क समूहों की पहचान कर टारगेटेड स्क्रीनिंग की जाए, तो न सिर्फ बीमारी की निगरानी अधिक सटीक हो सकती है, बल्कि स्वास्थ्य संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव है। यह तरीका “प्रिसिजन मेडिसिन” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले और शोध व नीतिगत फैसलों की जरूरत है। फिर भी, यह अध्ययन संकेत देता है कि बड़े डेटा पर प्रशिक्षित एआई मॉडल भविष्य में व्यक्तिगत जोखिम आकलन और कैंसर स्क्रीनिंग रणनीतियों को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
--आईएएनएस
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